डॉ. राधाकृष्ण मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी वाहन को अपने घर ले गए। यह सरकारी वाहन 10 दिन से उनके घर पर ही खड़ा है। लेकिन इस सारे मामले से मेडिकल कॉलेज प्रशासन अनजान बना हुआ है। कॉलेज में प्रशासनिक कामकाज की देखरेख के लिए वैसे तो प्रदेश सरकार ने यहां सहायक निदेशक के पद पर एक एचएएस अधिकारी की नियुक्ति कर रखी है।
लेकिन हैरानी की बात है कि सहायक निदेशक को भी नहीं पता कि अस्पताल का सरकारी वाहन कहां गायब हो गया। सरकार ने डॉक्टर अनिल चौहान को 30 सितंबर को सेवानिवृत्त कर दिया है। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद मेडिकल कॉलेज में अभी तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। न ही किसी अन्य अधिकारी को प्राचार्य का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। कोरोना कॉल में प्राचार्य का पद खाली होना की सवाल खड़े कर रहा है। उधर, डॉ. अनिल से संपर्क करने के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
टीएमसी में प्राचार्य पद पर रहते हुए 7 लाख की देनदारी
डॉ. अनिल पूर्व में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा में प्राचार्य रह चुके हैं। टांडा में कुछ वर्षों तक सेवाएं देने के बाद उनका तबादला शिमला हो गया। लेकिन शिमला में ज्वाइन करने के बाद भी उन्होंने टीएमसी में अपना आवास खाली नहीं किया। इसके बाद वित्त विभाग ने उन्हें करीब 7 लाख की रिकवरी का नोटिस थमा दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुच रकम सरकारी खजाने में जमा करवा दी है। लेकिन शेष बड़ी रकम अभी भी वैसे ही जमा करवाने को है।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में प्रिंसिपल का पद खाली होने का मामला सरकार के ध्यान में है। इस पद पर शीघ्र ही सक्षम अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। किस कारण से सरकारी वाहन को सेवानिवृत्त प्रिंसिपल ने अपने घर में खड़ा किया है, इसकी जांच की जाएगी।
- डॉ. राजीव सैजल, स्वास्थ्य मंत्री
मेडिकल मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का सरकारी वाहन कहां है, इस बारे में छानबीन की जाएगी। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में अभी तक प्रिंसिपल का पद खाली है।
- संजीव कुमार, अतिरिक्त निदेशक डॉ राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर