सौर पैनलों की प्रणाली को एजेंसी देती है दिशा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के प्रौद्योगिकी संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. मनीष कुमार को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की फोटोवोल्टिक पावर सिस्टम्स टास्क तेरह का विशेषज्ञ सदस्य नियुक्त किया है। डॉ. मनीष सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनो टेक्नोलॉजी के उपनिदेशक भी हैं।
देश के हाल ही में इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से जुड़ने के बाद वह टास्क तेरह में विशेषज्ञ सदस्य बनने वाले पहले प्रतिनिधि बने हैं। यह मंच सौर पैनलों के क्षरण, तकनीकी विफलताओं के कारण, प्रणाली की विश्वसनीयता और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे अहम विषयों पर वैश्विक स्तर पर शोध को दिशा देता है। डॉ. कुमार की विशेषज्ञता फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रणालियों के क्षेत्र में मानी जाती है जिससे वैश्विक सौर ऊर्जा अनुसंधान को नई दृष्टि मिलने की उम्मीद है। यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती शोध पहचान को भी मजबूत करती है।
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डॉ. मनीष कुमार का अंतरराष्ट्रीय शोध अनुभव काफी लंबा है। वह जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर सोलर एनर्जी सिस्टम्स में विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में कार्य कर चुके हैं। इससे पहले नार्वे के इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी टेक्नोलॉजी में वैज्ञानिक के रूप में योगदान दे चुके हैं। इन्हें प्रधानमंत्री अर्ली कॅरिअर रिसर्च ग्रांट और इंडो जर्मन साइंस एंड टेक्नोलॉजी अर्ली कॅरिअर रिसर्च अवार्ड से पुरस्कृत किया जा चुका है।
यह है अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी पेरिस स्थित एक स्वायत्त अंतर सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना 1974 में ओईसीडी के कानूनी ढांचे के तहत की थी। यह संगठन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साझा मंच प्रदान करता है।