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हिमाचली किसान का बेटा बना पीजीआई का डायरेक्टर, ऐसे मिली कामयाबी

Sat, 18 Mar 2017 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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लंबे इंतजार और कई विवादों के बाद आखिरकार पीजीआई को नया डायरेक्टर मिल गया है। कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी (एसीसी) से हरी झंडी मिलने के बाद शुक्रवार को कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने डॉ. जगतराम को नया डायरेक्टर नियुक्त कर दिया है।
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डॉ. जगतराम पीजीआई के ऑप्थल्मोलॉजी (आई) डिपार्टमेंट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट (एचओडी) हैं। वह हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ के रहने वाले हैं। पीजीआई के कैरोब्लॉक में शुक्रवार देर शाम उन्होंने डायरेक्टर का पदभार भी संभाल लिया।

पिछले साल छह अक्तूबर को डॉ. योगेश कुमार चावला डायरेक्टर पद से रिटायर हो गए थे। उसके बाद से पीजीआई के डीन डा. सुभाष वर्मा कार्यकारी डायरेक्टर का पद संभाल रहे थे।
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पीजीआई में कभी पेड़ के नीचे सोए थे डॉ. जगतराम

डॉ. जगतराम गरीब किसान के बेटे हैं। 1979 में जब वह पीजीआई में एमडी की परीक्षा देने आए थे तो परीक्षा देने के बाद कैरों ब्लॉक के आगे ही पेड़ के नीचे सो गए थे। उनके पिता पढ़े लिखे नहीं थे, इसके बावजूद अपनी प्रतिभा, मेहनत और लग्न से वे आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

डायरेक्टर की दौड़ में तीसरे नंबर पर थे
डायरेक्टर को चुनने के लिए गठित की गई सलेक्शन कमेटी ने जो मैरिट बनाई थी, उसमें डा. जगतराम का तीसरा नंबर था। पहले नंबर पर इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अनिल भंसाली, दूसरे नंबर पर पीडियाट्रिक की प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह थे।

मैरिट में पहला स्थान होने के कारण डॉ. भंसाली के डायरेक्टर चुने जाने की काफी संभावना जताई जा रही थी, लेकिन यही बात उनके डायरेक्टर बनने में बाधा बन गई।
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