सूबे को नशा मुक्त करने और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में बदलाव करेगा। अब बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में सिर्फ स्कूली छात्रों की सेहत ही नहीं जांची जाएगी, बल्कि छात्र नशा करता है या नहीं, इसकी भी जांच होगी।
अगर विद्यार्थी नशे का आदी पाया गया तो सरकार उसकी नशे की लत को छुड़ाने के लिए काउंसलिंग करवाएगी। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने धर्मशाला में दी।
नशे की दलदल से स्कूली बच्चों को निकालने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, जिसका अभी पेपरवर्क चल रहा है। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग इस कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों की जांच करेंगे।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में परिजनों को भी शामिल किया जाएगा। मेडिकल एसोसिएशन ने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष मांग रखी कि पीजी करने वाले डॉक्टरों की 10 लाख रुपये की बांड राशि में बदलाव करते हुए इस राशि को कम किया जाए।
27 नई एंबुलेंस खरीदीं, 50 और की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवा प्रबंधन को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। सरकार ने पूछा कि अगर वह यहां काम नहीं करना चाहते तो अपना पक्ष रख दें। अगर 108 प्रबंधन काम नहीं कर सकता तो सरकार किसी अन्य कंपनी को टेंडर देगी। सरकार ने 27 नई एंबुलेंस खरीद ली हैं, जबकि 50 और जल्द खरीदी जाएंगी।