जिला परिषद शिमला की वीरवार को बचत भवन में आयोजित बैठक से सभी सदस्यों ने मिलकर वॉकआउट किया। बैठक में पहुंचे अलग अलग विचारधारा के सदस्यों और पंचायत समिति सदस्यों ने एक आवाज में प्रदेश सरकार के एक फैसले का विरोध किया।
यह फैसला पांच अप्रैल को जारी पंचायती राज विभाग की अधिसूचना में विकास कार्यों की राशि में कटौती करने और 16 अगस्त की अधिसूचना में विकास कार्यों को लेकर जारी गाइडलाइन से जुड़ा है।
सदस्यों से मामले पर शांतिपूर्वक चरचा करने और इस मामले को सरकार व विभाग से उठाने की बात भी की, बावजूद इसके सदस्यों ने एक मत से विचारधारा को अलग छोड़ कर इन अधिसूचनाओं क विरोध में बैठक से वॉकआउट किया। सदस्यों ने बैठक में हाजिरी तक नहीं लगाई।
सदस्यों के बैठक छोड़ कर चले जाने के बाद कोरम पूरा होना संभव नहीं हो पाया इस कारण बैठक नहीं हो पाई। इसके लिए जिला परिषद सदस्यों के साथ मिलकर जल्द मुख्यमंत्री से एक बार फिर सदस्य मुलाकात कर वास्तविक स्थिति और नए फैसलों से पेश आ रही समस्याओं को उठाएंगे।
इसलिए किया विरोध
बैठक से बाहर निकले सदस्यों निरंजन वर्मा, भुपेश धीमान, प्रेम ठाकुर सहित अन्य सदस्यों ने कहा कि इन दो अधिसूचनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास प्रभावित होगा। पंचायती राज विभाग ने पांच अप्रैल को पंचायती राज विभाग की जारी की अधिसूचना में 13वें वित्त आयोग के तहत भारत सरकार से जो पंचायती राज संस्थाओं को पैसा आता है।
उसमें कुल 50 फीसदी में से बीस फीसदी को मनरेगा में लाने का फैसला दिया गया है। सदस्यों ने इसे कटौति के कारण जिला परिषद के पास महज तीस प्रतिशत राशि ही बचेगी और पंचायत समितियों के पास दस फीस धन ही बचेगा। जो पहले 50 और तीस प्रतिशत मिलता था।
वहीं 16 अगस्त की अधिसूचना के तहत जारी नई गाइडलाइन में उसमें योजनाओं की संख्या को 25 से घटाकर 13 कर दिया गया है। जो योजनाएं जिला परिषद को दी गई है, उससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास करवाना मुश्किल हो रहा है। यह गाइडलाइन विकास को गति देने के लिए सही नहीं है।