दूसरी ओर दून के सौड़ी गांव के सात परिवार आज भी किराए के मकान में रह कर मजदूरी कर रहे हैं। इन लोगों की उपजाऊ जमीन भूमि कटाव से खड्ड में समा गई है। जहां पर जमीन थी, वह जगह पहाड़ में तब्दील हो गई है। गांव में संजय, रमेश, सुखराम, चेपूराम, मान सिंह, चमन व यशोदा के परिवार रहते थे। वर्तमान में ये किराए पर रह रहे हैं। सरकार की ओर से इन लोगों को तीन-तीन लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई, लेकिन अभी तक इन्हें जमीन नहीं मिल पाई है। नवांनगर निवासी संजय कुमार ने कहा कि किराए के मकान में रह रहे हैं। उनके साथ के सभी लोग किराए पर रह रहे हैं। सुखराम बद्दी साई मार्ग पर भूपनगर के साथ पुल के समीप कमरे में रहता है। चेपू राम व मान सिंह दसोरा माजरा व यशोदा भटोली खुर्द में रह रही हैं। सरकार की ओर से अभी उनके मकान बनाने के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। किराए पर महंगे मकान मिल रहे हैं। उनकी दिहाड़ी किराए में निकल रही है।
शामती निवासी मनीष ने कहा कि आपदा के समय उनके घर के तीन कमरे पूरी तरह से टूट गए थे। आपदा के दौरान एक सप्ताह तक जटोली मंदिर में रहना पड़ा था। सरकार ने सात लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन तीन साल बाद भी केवल तीन लाख रुपये ही मिल पाए। इसमें डेढ़ लाख रुपये घर के पीछे डंगा लगाने के लिए खर्च हो गए और बचे हुए पैसों से केवल दो कमरे ही बन पाए। टूटे हुए कमरों के नीचे लाखों का सामान दब गया था। रसोईघर पर छत नहीं लग पाई। तिरपाल लगाया है, लेकिन वह भी खराब हो गया है। पैसों की जरूरत है, लेकिन कुछ नहीं मिल रहा है। प्रशासन व पंचायत में बार-बार चक्कर लगाए कुछ नहीं हुआ। शामती निवासी सोहन लाल ने कहा कि पहले साईं मंदिर से होने से आने-जाने का रास्ता बना हुआ था, लेकिन आपदा के बाद से अब तक कोई रास्ता नहीं है। घर से मुख्य सड़क तक जाने के लिए कच्चे रास्ते से होकर जाना पड़ रहा है। ऐसे में बुजुर्ग होने के कारण दो लोगों का सहारा लेना पड़ रहा है।
उधर, बद्दी के तहसीलदार सतेंद्र जीत ने बताया कि प्रशासन ने प्रभावितों के लिए तीन स्थानों पर जमीन देखी। वर्तमान में झाड़माजरी में जमीन देखी है। सात में से कुछ लोग यहां पर आने को तैयार हो गए हैं लेकिन कुछ अभी भी भटोली कलां में जमीन देने की मांग पर अड़े हैं। भटोली कलां के लोग जमीन देने को तैयार नहीं है।
आपदा को गुजरे तीन साल हो गए हैं। कभी रात को बारिश होती है तो नींद उड़ जाती है। यहां प्रशासन ने तीन साल पहले वादा किया था कि घर के साथ तक नाले में डंगा लगाया जाएगा, ताकि पानी घरों की ओर न जाए, लेकिन अभी तक यह काम पूरा नहीं हो रहा है। नाले के ऊपरी हिस्से में अभी भी कई बड़े पत्थर अटके हुए हैं। रात को डर रहता है कि कोई आपदा न आए।-शकुंतला, शामती सोलन
वह भटोली कलां में किराए के मकान में रहता है। तीन साल बीत जाने के बाद भी उन्हें मकान बनाने के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। सरकार की ओर से उन्हें जो पैसा मिला था। वह उनका तीन साल में किराए के रूप में व्यय हो गया है। वर्तमान में वह अपना परिवार मजदूरी करके पाल रहे हैं। -चमन लाल, माजरू गांव