लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधानमंडलों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों और प्रौद्योगिकी को साझा करने से लोकतांत्रिक संस्थाएं सशक्त होती हैं। धर्मशाला के तपोवन विधानसभा में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र, जोन-2 के वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने संसाधनों के प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे नवाचारों को अपनाकर विधानमंडलों को अधिक कुशल बनाने का आह्वान किया। यदि प्रत्येक जनप्रतिनिधि प्रौद्योगिकी का प्रभावी ढंग से उपयोग करे तो वह अपने निर्वाचन क्षेत्र की चुनौतियों का बेहतर ढंग से समाधान कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक राष्ट्र एक विधायी मंच पहल का उल्लेख करते हुए बिरला ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की संसद निकट भविष्य में सभी राज्य विधानमंडलों के लिए एक साझा मंच तैयार करेगी। डिजिटल पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की संसद संसदीय कार्य में दक्षता बढ़ाने के लिए एआई का व्यापक रूप से उपयोग कर रही है। केंद्रीय विधानमंडल के रूप में संसद की यह जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए इन आधुनिक तकनीकी साधनों को राज्य विधानसभाओं के साथ साझा करे।
बिरला ने आग्रह किया कि सरकार को सभी नागरिकों, विशेष रूप से उपेक्षित वर्गों के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सुशासन और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। विधायकों और विधायी निकायों का भी यह कर्तव्य है कि जनता की सौंपी जिम्मेदारियों को पूरा कर लोगों के जीवन में सकारात्मक सामाजिक-आर्थिक बदलाव लाएं। निकायों को प्रगति के लिए आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाते हुए विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। ग्राम पंचायतों से लेकर नगर पालिकाओं और राज्य विधानसभाओं तक, निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी संस्थाओं को संवाद, नवाचार और उत्कृष्टता का केंद्र बनाना चाहिए।
लोकतांत्रिक सुधारों की धरती है हिमाचल : बिरला
हिमाचल की गौरवशाली लोकतांत्रिक विरासत के बारे में बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि हिमाचल देवभूमि, अध्यात्म और वीरभूमि के नाम से जानी जाती है। यह लोकतांत्रिक सुधारों की धरती है। हिमाचल के लोग अपनी देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। 1921 में पीठासीन अधिकारियों का पहला सम्मेलन शिमला में आयोजित हुआ था। बिट्ठलभाई पटेल भी हिमाचल से केंद्रीय विधान परिषद के सभापति चुने गए थे। हिमाचल विधान सभा देश की पहली पेपरलेस विधानसभा है। हम 2026 तक सारे राज्यों की विधानसभाओं को एक मंच पर ला सकते हैं। अगर किसी को किसी को तकनीकी मार्गदर्शन की जरूरत है तो वह उपलब्ध करवाया जाएगा।