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Dhanteras 2026: धनतेरस पर क्या खरीदने से घर में बरसेगी लक्ष्मी की कृपा? कब शुरू होगी त्रयोदशी तिथि; जानें

Wed, 04 Nov 2026 04:43 PM IST
Ankesh Dogra भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

धनतेरस का पर्व इस वर्ष 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पढ़ें पूरी खबर...

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Dhanteras 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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दीपावली की रौनक शुरू होने से पहले ही बाजारों में एक खास दिन का इंतजार बढ़ने लगा है। यह दिन है धनतेरस का, जब लोग केवल खरीदारी ही नहीं करते, बल्कि अपने घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ नई वस्तुओं का स्वागत भी करते हैं। इस बार 6 नवंबर को धनतेरस मनाया जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है और किन वस्तुओं को घर लाने की परंपरा रही है?

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सोना-चांदी से लेकर पीतल के बर्तनों तक का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीतल के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन घर में नई धातु की वस्तुएं लाने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि होती है। कई परिवार इस अवसर पर सोने-चांदी के सिक्के, आभूषण, चांदी के बर्तन और पीतल के घरेलू सामान खरीदना पसंद करते हैं। वहीं, अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार लोग अन्य उपयोगी घरेलू वस्तुओं की खरीदारी भी करते हैं। इस परंपरा के पीछे समृद्धि और शुभ शुरुआत की भावना जुड़ी हुई है।

भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व
धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि से भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। जहां भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है, वहीं माता लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी तथा भगवान कुबेर को धन का अधिपति माना गया है। श्रद्धालु इस दिन पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

कब शुरू होगी त्रयोदशी तिथि?
राजधानी शिमला के गंज बाजार स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और इसका समापन 7 नवंबर को सुबह 10:57 बजे होगा। उन्होंने बताया कि धनतेरस पर नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन खरीदारी करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

बाजारों में सजने लगीं दुकानें, ग्राहकों का इंतजार
धनतेरस को लेकर शिमला के बाजारों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। आभूषणों की दुकानों से लेकर बर्तन विक्रेताओं तक ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपने प्रतिष्ठानों को सजाना शुरू कर दिया है। सोने-चांदी के आभूषणों, सिक्कों और पीतल के बर्तनों की आकर्षक सजावट बाजारों की रौनक बढ़ा रही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि धनतेरस के अवसर पर खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में ग्राहक बाजारों का रुख करेंगे। वहीं, लोग भी अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी की योजना बना रहे हैं।
 
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खरीदारी से बढ़कर शुभ शुरुआत का पर्व
धनतेरस केवल सोना-चांदी या महंगी वस्तुएं खरीदने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पर्व नई शुरुआत, स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से भी जुड़ा है। यही वजह है कि आर्थिक स्थिति के अनुसार छोटी से छोटी नई वस्तु खरीदकर भी लोग इस दिन को विशेष बनाते हैं। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा धनतेरस हर वर्ष दीपावली के उत्सव को एक नई शुरुआत देता है। इस बार भी 6 नवंबर को बाजारों की रौनक और घरों में पूजा-अर्चना के साथ इस पर्व को मनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं।

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