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Shimla News: डंपयार्ड में बदली हिंदुस्तान-तिब्बत रोड को जोड़ने वाली ढली टनल

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धरोहरों के हाल...5
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ब्रिटिश शासनकाल में 1852 में बनी ढली टनल तीन साल से है बंद, जीर्णोद्धार के लिए अभी तक नहीं मिल पाया बजट
शाम को नशेड़ियों का अड्डा बनने से लोग हैं परेशान

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1852 में हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग को जोड़ने के लिए बनाई गई राजधानी की ऐतिहासिक ढली टनल अब डंपयार्ड (कचरा रखने की जगह) में बदल गई है।
टनल के जीर्णोद्धार के लिए सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण इसे बंद कर दिया है। 170 वर्षों तक आवाजाही के लिए खुली रही इस ऐतिहासिक टनल की हालत अब बदतर हो चुकी है। टनल के दोनों छोर बंद हैं। इसके बाहर खटारा और पुरानी गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं। नई टनल के शुरू होने के बाद पुरानी ढली टनल के बाहर पानी जमा होने लगा है। टनल के भीतर दीवारों से मिट्टी और पानी का रिसाव हो रहा है। अब यह नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है। वर्ष 2023 में यहां नई डबललेन टनल बनने के बाद सरकार ने पुरानी टनल को बंद करवा दिया था। इसके साथ ही इसके जीर्णोद्धार का दावा भी किया था। दशकों तक शिमला की पहचान रही इस टनल को हेरिटेज साइट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से टनल का सर्वेक्षण कराया गया। भू-वैज्ञानियों से भी इसकी मजबूती का आकलन करवाया गया। सर्वेक्षण के बाद कॉरपोरेशन ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर छह करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा। हालांकि इसके लिए अब तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ। ऐसे में जीर्णोद्धार की योजना फाइलों तक ही सीमित रह गई है और यह ऐतिहासिक धरोहर लगातार बदहाल होती जा रही है।
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मेजर ब्रिग्स ने कराया था निर्माण
ब्रिटिश शासनकाल में जब शिमला देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी था, तब हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग पर इस टनल का निर्माण तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी मेजर ब्रिग्स ने कराया था। 150 मीटर लंबी इस सिंगल लेन टनल का निर्माण वर्ष 1850 में संजौली और ढली के बीच पहाड़ी को काटकर शुरू किया था। लगभग दो वर्षों में, 1852 में इसका निर्माण पूरा हुआ। अंग्रेजों के जाने के बाद भी कई दशकों तक शिमला और ऊपरी शिमला को जोड़ने के लिए यही टनल प्रमुख मार्ग रही। बाद में बाईपास सड़कें बनने के बावजूद इसका महत्व बना रहा। टनल की जर्जर स्थिति को देखते हुए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यहां नई डबललेन टनल का निर्माण किया गया। वर्ष 2023 से पुरानी टनल पूरी तरह बंद है।
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लोग कर रहे टनल खोलने और संरक्षण की मांग
स्थानीय लोग लंबे समय से इस ऐतिहासिक टनल के जीर्णोद्धार की मांग उठा रहे हैं। नगर निगम सदन भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर चुका है। भट्ठाकुफर के पार्षद नरेंद्र ठाकुर, शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और अपर ढली की पार्षद कमलेश मेहता ने कहा कि यह टनल शहर की ऐतिहासिक धरोहर है। इसे हेरिटेज साइट के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। वर्तमान में यह नशेड़ियों का अड्डा बन चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए शीघ्र ठोस योजना बनानी चाहिए।
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