शिमला और कुल्लू जिले के देवी-देवता शुक्रवार को मकर संक्रांति के दिन एक माह के लिए स्वर्ग प्रवास पर निकलेंगे। देवी-देवताओं के गुर माली विधिविधान के साथ पूजा अर्चना कर आराध्य देवताओं को विदा करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मध्यरात्रि के बाद स्नान कर पकवान तैयार कर स्वर्ग प्रवास पर जाने वाले देवताओं को खुले आसमान की तरफ धूप और जल अर्पित करेंगी।
देव संसद में भाग लेने पर कुल्लू घाटी के कुछ देवी-देवता एक सप्ताह के अंतराल में ही वापस लौट आते हैं। शिमला जिले के कुछ देवी-देवता एक पखवाड़े के भीतर वापसी करते हैं। अधिकांश देवी-देवता पूरे एक महीने स्वर्ग प्रवास पर रहकर फाल्गुन संक्रांति को अपने-अपने देवालयों में लौटते हैं।
स्वर्ग प्रवास के दौरान क्षेत्र भर में शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। यहां तक कि मंदिरों में भी कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं होते। देवी, देवताओं के जाने के बाद मंदिरों में धार्मिक कार्यों पर अघोषित रोक लग जाती है। लोग अपने-अपने देवताओं को सप्ताह भर और एक महीने के दौरान आकाश की ओर धूप व पानी अर्पित करेेंगे। मान्यता है कि स्वर्ग में देवी-देवताओं को क्षेत्र भर में होने वाली अच्छी और बुरी घटनाओं से अवगत करवाते हैं।
स्वर्ग प्रवास के बाद देवी-देवता अपने गुरों के माध्यम से भविष्यवाणी करते हैं। परशुराम मंदिर समिति डंसा के प्रधान खेलचंद नेगी, उप प्रधान संसार दास, कोषाध्यक्ष दुर्गादत्त शर्मा और महासचिव जीएल डमालू ने बताया कि स्वर्ग प्रवास के बाद लोग अपने आराध्यों देवताओं का वापस आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।