पूर्व छात्रों, सेवानिवृत्त शिक्षकों को आंदोलन में करें शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला की स्वायत्तता और अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) का आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने प्रस्तावित विधेयक के प्रत्येक प्रावधान का अध्ययन करने और उसके संभावित प्रभावों का तथ्यात्मक विश्लेषण करने की मांग उठाई। संघ ने पूर्व छात्रों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, गैर शिक्षक कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को जोड़कर अभियान को गति देने पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि सरकार ने विवि की स्वायत्तता खत्म करने का प्रस्ताव पारित किया है। संघ ने कहा कि विधेयक के सभी प्रावधानों का अध्ययन कर उनके संभावित प्रभावों की जानकारी विश्वविद्यालय समुदाय और आम जनता तक पहुंचाई जाएगी। इसके लिए अन्य विश्वविद्यालयों और निष्पक्ष शिक्षाविदों के साथ संवाद स्थापित करने पर भी जोर दिया।
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प्रदर्शन में डॉ. जसवीर, डॉ. दीप लता, डॉ. अशोक बंसल, डॉ. विनोद नेगी, डॉ. सुनील, संयुक्त सचिव डॉ. अंजलि शर्मा और सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने विचार रखे। डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उनका शिक्षण, शोध और प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
डॉ. दीप लता ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता से जुड़ा विषय केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पूर्व छात्रों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रतिनिधियों को भी संवाद में शामिल करना चाहिए। डॉ. अशोक बंसल ने शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र निर्णय प्रक्रिया को आवश्यक बताया है। डॉ. अंजलि शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता आने वाली पीढ़ियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी है, इसलिए इसकी रक्षा जरूरी है।