18 साल से मनरेगा का काम संभाल रहे है 1023 ग्रामीण रोजगार सेवक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। पंचायतों में योजनाओं का काम संभालने वाले ग्रामीण सेवकों को चार महीनों से वेतन नहीं मिल पाया है। ऐसे में अब ग्रामीण रोजगार सेवकों ने सरकार के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। ग्रामीण रोजगार सेवकों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद अधिकारी उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि अब कर्मचारी आने वाले दिनों में आंदोलन भी कर सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में पिछले 18 साल से ग्रामीण रोजगार योजनाओं का काम संभाल रहे 1023 ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) के सामने अब वेतन का संकट खड़ा हो गया है। ग्राम रोजगार सेवक संघ का दावा है कि चार माह का वेतन अब तक लंबित है। जिला शिमला ग्रामीण रोजगार सेवक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर का कहना है कि विधानसभा में भी यह मामला उठाया है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर केंद्र के साथ पत्राचार चल रहा है, लेकिन दूसरी ओर जमीन पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया है। ग्राम रोजगार सेवक संघ का कहना है कि उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। अध्यक्ष ने सरकार से मांग की है कि स्थायी समाधान निकालकर समय पर वेतन दिया जाए। बता दें कि इससे पहले यह लोग पंचायतीराज विभाग के निदेशक राघव शर्मा से भी इस बारे में मिल चुके हैं।