विवि में लागू सरकार के 120 प्वाइंट रोस्टर में नहीं शामिल ओबीसी, ईडब्लूएस श्रेणी
इडब्लूएस को सीटें बढ़ाकर दिया जा रहा है वर्तमान में पीजी कोर्स तक प्रवेश में आरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ओबीसी के लिए पीजी और पीएचडी तक की प्रवेश प्रक्रिया में आज तक आरक्षण की सुविधा नहीं मिली है। पीजी तक के कोर्स में विवि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को जरूर सीटें बढ़ाकर (ओवर एंड अबव) जरूर सीटें आरक्षित कर आवंटन कर रहा है।
हर बार नये सत्र की प्रवेश प्रक्रिया के शुरू होने पर अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की ओर से ओबीसी के लिए सीटें आरक्षित कर आवंटित की जाने की मांग उठती रही है, मगर इसे विवि न तो पूरा कर पाता और न ही इसको लेकर ओबीसी छात्रों को कोई जवाब दे पाता है। विश्वविद्यालय हर बार प्रदेश सरकार से ओबीसी को आरक्षण दिए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग करता आया है, मगर यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई। ऐसे में विवि में प्रवेश को आने वाले इन अन्य पिछड़ा वर्ग क छात्रों को सीटें आरक्षित नहीं कर पाया है। विश्वविद्यालय प्रदेश सरकार के 120 प्वाइंट रोस्टर को अपनाकर प्रवेश में लागू करता है, इसमें ओबीसी के साथ ईडब्लूएस श्रेणी भी शामिल नहीं है। विवि इसलिए कॉलेजों की तर्ज पर 120 प्वाइंट रोस्टर के तहत ही प्रवेश दे रहा है। एक ही प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में दो अलग-अलग रोस्टर लागू करना संभव नहीं है। विश्वविद्यालय की ओर से सरकार को पहले भेजे गए पत्र में ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए दिए गए आरक्षण को भी शामिल करने की मांग की है। विश्वविद्यालय केंद्र सरकार के फैसले और आदेशों के अनुरूप आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को सीटें बढ़ाकर (ओवर एंड अबव) आरक्षण की सुविधा पीजी कोर्स में प्रवेश तक दे पा रहा है। पीएचडी में इसके लिए भी आरक्षण की सुविधा नहीं दे पा रहा है।
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सरकार के स्तर पर फैसला होने पर ही दिया जा सकेगा ओबीसी को आरक्षण- डीएस
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने माना कि विवि में पीजी और पीएचडी कोर्स की प्रवेश प्रक्रिया में ओबीसी को आरक्षण की सुविधा नहीं दी जा रही है। विवि प्रदेश सरकार द्वारा अधिसूचित आरक्षण के 120 प्वाइंट रोस्टर को अपनाकर लागू किया है, इसमें ओबीसी श्रेणी शामिल नहीं है। सरकार के ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग क विद्यार्थियों के आरक्षण को लागू करने को अधिसूचित करेगा, तभी विवि इन दोनों श्रेणियों को आरक्षण दे पाएगा। उन्होंने माना कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को पीजी में सीटें बढ़ाकर दस फीसदी आरक्षण विवि अपने स्तर पर दे पा रहा है। पीएचडी में विवि इन वर्गों को आरक्षण देने को अपने स्तर पर सीटें नहीं बढ़ा सकता। सरकार से इन दोनों वर्गों को आरक्षण दिए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया है। इन दोनों श्रेणी को आरक्षण रोस्टर में शामिल करने की मांग की है।