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दिल्ली पहुंचे महापौर ने केंद्रीय विभागों को सौंपे दो प्रस्ताव, बजट जारी करने के लिए केंद्रीय वित्त आयोग के सलाहकार से मिले
कहा-शिमला को जल्द जारी हो पैसा, केंद्र की योजनाओं में अंशदान घटाने का भी रखा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बजट जारी न होने से काम ठप होने का मामला अब महापौर सुरेंद्र चौहान ने केंद्र के समक्ष उठाया है। दिल्ली पहुंचे महापौर सुरेंद्र चौहान ने मंगलवार को केंद्रीय विभागों में जाकर बजट से जुड़े दो प्रस्ताव सौंपे हैं। इन प्रस्तावों से शिमला को अक्तूबर तक करोड़ों का बजट मिलने की उम्मीद है।
महापौर ने सबसे पहले केंद्रीय वित्त आयोग (सीएफसी) प्रकोष्ठ के आर्थिक सलाहकार गोपाल प्रसाद से मुलाकात की। कहा कि शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाले केंद्रीय वित्त आयोग अनुदान की किस्त जारी नहीं हो रही है। इसके चलते शिमला में नए काम ठप हो गए हैं। केंद्र से मिलने वाले करोड़ों रुपये की राशि अटकने से शहर में पेयजल, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन समेत अन्य आधारभूत नागरिक सेवाओं से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। आग्रह किया कि यह अनुदान जल्द जारी किया जाए जिससे प्रगति पर चल रहे विकास कार्य बाधित न हों। महापौर के अनुसार आर्थिक सलाहकार गोपाल प्रसाद ने भरोसा दिया है कि यह अनुदान अक्तूबर तक हिमाचल सरकार को जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद यह नगर निगम को जारी होगा। महापौर ने आर्थिक सलाहकार का समय देने और बजट जारी करने का आश्वासन देने के लिए आभार जताया।
पहाड़ी निकायों का अंशदान 30 फीसदी करने की मांग
महापौर सुरेंद्र चौहान ने दिल्ली में मंगलवार को केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की संयुक्त सचिव ईशा कालिया से मुलाकात की। महापौर ने इस दौरान पहाड़ी शहरों की शहरी अवसंरचना के वित्तपोषण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उनके समक्ष रखे। आग्रह किया कि केंद्र प्रायोजित शहरी योजनाओं के मौजूदा वित्तपोषण प्रारूप में संशोधन किया जाए। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के शहरी स्थानीय निकायों का अंशदान 50 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करने की मांग रखी। इसका लिखित प्रस्ताव भी दिया। कहा कि अभी केंद्र की योजनाओं में शहरी निकायों का 50 फीसदी अंशदान है। पहाड़ी शहरों में विषम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित निर्माण योग्य भूमि और निर्माण सामग्री और परिवहन की अधिक लागत के कारण परियोजनाओं की प्रति इकाई लागत मैदानी क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रहती है। इसके बावजूद शहरी निकायों का अपना राजस्व आधार सीमित है। ऐसे में पहाड़ी राज्यों के लिए अलग और रियायती वित्तपोषण प्रारूप जरूरी है। महापौर ने अर्बन चैलेंज फंड योजना को जल्द लागू करने का आग्रह भी किया। महापौर ने नगर निगम शिमला को इस फंड के तहत गुणवत्तापूर्ण और व्यवहार्य परियोजना प्रस्ताव तैयार करने के लिए तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाने की मांग भी रखी। संयुक्त सचिव ईशा कालिया ने महापौर को आश्वस्त किया कि परियोजनाओं के निर्माण के लिए नगर निगम शिमला को आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करवाई जाएगी।