प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों की नियमितीकरण प्रक्रिया में कानूनी पेच फंस गया है। वित्त विभाग ने प्रस्तावित पालिसी पर आपत्ति जताई है, जिसके बाद पालिसी के कानूनी पहलू परखने के लिए मामला विधि विभाग को रेफर किया गया है।
कई अन्य राज्यों की नियमितीकरण पालिसी पर न्यायालय की रोक लग चुकी है। सुप्रीम कोर्ट तो उमा देवी बनाम कर्नाटक मामले में आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बता चुका है।
ऐसे में प्रदेश सरकार का विधि विभाग नियमितीकरण पालिसी के लिए कानूनी आधार तलाश रहा है। दरअसल, सरकार ने पंजाब के आउटसोर्स कर्मचारी कल्याण बिल 2016 को हिमाचल में लागू करने का निर्णय लिया था।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फरवरी माह में इसकी घोषणा की थी, जिसके तहत नियमितीकरण की नीति को एक महीने में लेकर आने का एलान किया गया। पंजाब की पालिसी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
सीएम की घोषणा के एक माह बाद भी नहीं बनी पॉलिसी
इधर, घोषणा के एक माह बाद भी हिमाचल सरकार पालिसी का खाका तैयार नहीं कर पाई है। सूत्रों की मानें तो वित्त विभाग की आपत्ति के बाद सरकार ने विधि विभाग को पालिसी जारी करने को लेकर तमाम कानूनी पहलुओं को परखने का निर्देश दिया है।
अन्य राज्यों में आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर लिए गए फैसले उच्च न्यायालयों ने रोक दिए हैं। ऐसे में सीएम की घोषणा पर अमल करना शासन के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। पालिसी गठन पर प्रगति को लेकर संबंधित विभाग चुप्पी साधे हुए है।
इस संबंध में मुख्य सचिव वीसी फारका ने बताया कि पालिसी का खाका तैयार किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर विभिन्न पहलुओं पर मंथन हो रहा है। कानूनी रूप से मजबूत पालिसी लाने में समय लग रहा है।
पढ़िए, क्या है उमा देवी वाद
सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने वर्ष 2006 में उमा देवी बनाम कर्नाटक सरकार केस में दैनिक और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के खिलाफ फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि स्थायी कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया, आरक्षण और भर्ती नियमों से इतर अगर कोई कर्मचारी काम चलाऊ व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए तैनात किया जाता है तो उसको नियमित नहीं किया जा सकता है। ऐसे कर्मचारियों को नियमित करने से संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को भी गलत ठहराया था।
उत्तराखंड सरकार को हाईकोर्ट से झटका
उत्तराखंड सरकार ने 19 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा में परिवर्तित करने के निर्णय पर 25 जनवरी 2017 को रोक लगा दी थी। कोर्ट में याचिकाकर्ता ने उमा देवी वाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने आउटसोर्स कर्मचरियों को संविदा पर करने की प्रक्रिया को अन्य अभ्यर्थियों के लिए संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हनन मानते हुए रोक लगा दी।
हैदराबाद हाईकोर्ट ने भी दिया स्टे
तेलंगाना सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की दस वर्ष से अधिक के सेवाकाल को आधार बनाकर नियमित करने का फैसला लिया था, जिस पर उच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल 2017 को रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि उमा देवी केस के अनुरूप जो कर्मचारी नियमितीकरण की प्रक्रिया में योग्य हैं उन पर ही निर्णय लिया जा सकता है।