दीपिका मौत मामले में पीजीआई प्रबंधन ने परिवार को जांच का भरोसा दिया है। हालांकि, परिवार को उस डॉक्टर का नाम और पहचान बतानी होगी, जिसने आपातकालीन कक्ष में दीपिका को दाखिल करने से इनकार कर दिया था।
दीपिका को आईजीएमसी शिमला से 15 मार्च को रेफर किया गया था। दीपिका के ताया दीप राम के अनुसार वे दीपिका को उसी दिन पीजीआई ले गए। डॉक्टरों ने दीपिका को चलने-फिरने के लिए कहा और जब वो चलने लगी तो उसे तंदुरुस्त बताकर दाखिल करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद परिवार रात को गुरुद्वारे में रहा और अगले दिन किराये पर कमरा लेकर गुजारा किया। इस बीच आठ दिन तक दीपिका की मां और भाई उसे लेकर पीजीआई जाते रहे। आखिर 23 मार्च को दीपिका की हालत बेहद खराब होने पर उसे दाखिल किया गया। लेकिन उसी रात दीपिका की मौत हो गई।
परिजन लिखित में करें शिकायत
पीजीआई प्रवक्ता मंजू वडवालकर का कहना है कि परिजन जब तक लिखित शिकायत नहीं करेंगे, मामले की जांच शुरू नहीं हो पाएगी। यदि वे शिकायत करते हैं तो पीजीआई प्रबंधन इस मामले की पूरी तह तक जांच करेगा। उन्होंने बताया कि मरीज की हिस्ट्री, उसे पीजीआई लाने का समय और जिस चिकित्सक से मिले उसके बारे में जानकारी देना जरूरी है।
शोक में डूबा है पूरा परिवार
दीपिका के ताया दीप राम का कहना है कि दीपिका की मां बेसुध बिस्तर पर हैं। पूरा परिवार शोक में है। वे खुद हरिद्वार गए हैं। इस भारी सदमे से जूझने के बीच पीजीआई में शिकायत करने के लिए समय नहीं है। लेकिन जैसे ही हालात सुधरेंगे, इस मामले को हर स्तर पर उठाया जाएगा।
खाते में न डालें पैसे
दीपिका के ताया दीप राम का कहना है कि दीपिका के खाते में अब कोई भी दानी सज्जन राहत राशि न डाले। उन्होंने कहा कि जिन भी लोगों ने राहत राशि दान की है वे अपना-अपना खाता नंबर उन तक पहुंचाए। उनकी दान की गई राशि को लौटा दिया जाएगा। जब उनकी बेटी ही सलामत नहीं है तो वे दान की राशि भी नहीं रखेंगे।