बोल, 17 साल बाद भी हक के लिए खा रहे ठोकरें, सरकार से कई बार उठाया मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग में मर्ज न करने पर ग्राम रोजगार सेवक सरकार के खिलाफ भड़क गए हैं। ऐसे में इन लोगों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन करने की तैयारी शुरू कर दी है। संघ का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होगी, तब तक आंदोलन समय-समय पर जारी रखेंगे।
राज्य में ग्राम रोजगार सेवक (जीआरएसएस) की संख्या 1034 है। वहीं जिले में इनकी संख्या 105 है। लंबे समय से यह लोग ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग में मर्ज करने की मांग उठा रहे हैं। वहीं पंचायतीराज विभाग के निदेशक राघव शर्मा से भी इस मामले को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी के चलते ग्राम रोजगार सेवक संघ ने विधानसभा के बाहर धरना देने का निर्णय लिया है। संघ का आरोप है कि वर्ष 2008 में नियुक्त हुए ग्राम रोजगार सेवकों को करीब 17 साल का समय बीत जाने के बाद भी अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। संघ के अनुसार वर्ष 2008 में उनकी नियुक्तियां हुई थीं। साल 2016 में उन्हें दैनिक वेतन के दायरे में लाया गया, जबकि वर्ष 2018 से नियमित पे स्केल का लाभ मिलना शुरू हुआ। इसके बावजूद ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज करने की उनकी प्रमुख मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।
संघ का कहना है कि लंबे समय से विभाग के फील्ड स्तर पर काम करने के बावजूद उन्हें अलग कैडर के तौर पर रखा गया है, जिससे उनके भविष्य और सेवा शर्तों को लेकर लगातार असमंजस बना हुआ है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिवराज ठाकुर का कहना है कि पिछले कई वर्ष से यह मांग व सरकार व विभाग के निदेशकों से उठा चुके हैं। 24 अगस्त को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बावजूद लंबे समय से मांगों को लंबित रखा गया है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि एक समस्या यह भी है कि जो कर्मचारी बाद में नियुक्त हुए, उनमें से भी कुछ अभी तक दैनिक वेतन के दायरे में नहीं आ पाए हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी ग्राम रोजगार सेवकों की सेवा शर्तों को स्पष्ट कर समाधान किया जाए।