हिमाचल सरकार ने पंचायत जाखा को प्लास्टिक की टंकी की खरीद के लिए बजट दिया लेकिन पंचायत ने इससे सेब के पेड़ खरीद लिए। यही नहीं, सेब के पेड़ोें की खरीद में भी लाखों रुपये का घपला किया जिसके बाद डीसी शिमला अमित कश्यप ने पंचायत जाखा के प्रधान उमेश कुमार को प्रधान पद से निष्कासित कर छह साल के लिए चुनाव लड़ने से भी प्रतिबंधित कर दिया है। उपायुक्त शिमला ने अपने इस आदेश की जानकारी राज्य सचिवालय को दे दी है। इस आदेश को बुधवार को राजपत्र में भी प्रकाशित कर दिया है।
पंचायत में अनियमितताओं के आरोप में पंचायत प्रधान को अक्तूबर 2017 में निलंबित किया था। इसके बाद जिला प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ प्रधान ने मंडलायुक्त के पास अपील की थी। मंडलायुक्त ने इस बारे में नियमित जांच के आदेश के बाद प्रधान के निलंबन पर रोक लगा दी थी। एडीएम शिमला ने जांच रिपोर्ट डीसी शिमला को सौंपी, जिसमें प्रधान का पक्ष भी लिया गया।
लेकिन जांच अधिकारी के अनुसार प्रधान का जवाब संतोषजनक नहीं है। इस संदर्भ में डीसी शिमला ने दोबारा आदेश जारी कर पंचायत प्रधान जाखा उमेश कुमार को प्रधान पद से निष्कासित करने और छह साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
पंचायत प्रतिनिधि पर यह लगे हैं आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार पंचायत जाखा ने 5,57,300 रुपये की धनराशि को सेब पौधारोपण और 2,66,900 रुपये की धनराशि को प्लास्टिक की टंकी की खरीद पर खर्च करने का प्रस्ताव पारित किया। इस तरह से प्लास्टिक की टंकी की खरीद को आए 8,24,200 रुपये खर्च करने का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में क्रम संख्या 9 और 10 में प्लास्टिक की टंकी खरीदने के लिए बजट प्रावधान की बात को काटकर सेब के पौधों की खरीद कर ली गई। इस बारे में न तो बागवानी विभाग से पत्राचार किया और न अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया।
रॉयल कलमी सेब का पौधा खरीदने के लिए अनुमोदित 25 रुपये के बजाय 40 रुपये की दर से सेब के पौधे की खरीद की गई। सेब के कुल 19 हजार 465 पौधे खरीदे। इनका मूल्य 25 रुपये की दर से 4,85,625 रुपये बनता था लेकिन 40 रुपये के हिसाब से यह 7,78,600 रुपये हो गया। इस तरह से 2,91,972 रुपये की अधिक अदायगी की गई।