एचपीयू के चांसलर की ओर से इस मामले में दायर जवाब के अनुसार कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी इस बात से अनभिज्ञ थी कि सिकंदर कुमार के पास कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम के निदेशक का पद बतौर अतिरिक्त कार्यभार था।
हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के कुलपति डॉ. सिकंदर कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर के समक्ष मामले पर लंबी बहस हुई। सभी पक्षकारों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अब मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख दिया है।
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एचपीयू के चांसलर की ओर से इस मामले में दायर जवाब के अनुसार कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी इस बात से अनभिज्ञ थी कि सिकंदर कुमार के पास कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन स्कीम के निदेशक का पद बतौर अतिरिक्त कार्यभार था। सर्च कमेटी को दिए फार्म में इसका उल्लेख नहीं किया गया था।
सिकंदर कुमार ने अपने आवेदन में नोशनल एवं वास्तविक पदोन्नति के बारे में भी विशेष रूप से नहीं लिखा था, जिसके कारण यह तथ्य सर्च कमेटी के ज्ञान में नहीं था। चांसलर की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि विश्वविद्यालय ही सिकंदर कुमार की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के बारे में अच्छे से बता सकता है।