टुटीकंडी स्थित एजी कॉलोनी में सरकारी आवासों की हालत खस्ता है। दीवारों से पेंट की पपड़ियां उखड़ रही हैं और पानी तथा सीवेज की निकासी के लिए लगे पाइप जर्जर हो चुके हैं। आवासों के ऊपर लटके सूखे पेड़ और क्षतिग्रस्त छतें लोगों के लिए खतरा बनी हुई हैं। पार्क की सुविधा न होने से बच्चों को घरों के आसपास पार्किंग में खड़े वाहनों के बीच खेलना पड़ रहा है। पेश है संवाददाता सुमित ठाकुर की रिपोर्ट :-
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के टुटीकंडी स्थित एजी कॉलोनी में सरकारी आवासों की हालत खराब है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने पुराने समय में महालेखाकार कार्यालय के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए इस कॉलोनी का विस्तार किया था लेकिन अब यहां रहने वाले लोग बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जीवनयापन करने को मजबूर हैं।
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ब्लॉक नंबर 10 और 11 में रहने वाले करीब परिवारों को हर समय हादसे का डर सता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्लॉकों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि इनके कभी भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। इस बारे में नगर निगम को कई बार लिखित शिकायतें दी गई हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। वहीं एक अन्य ब्लॉक की छत पर चार साल पहले पेड़ की टहनी गिरने से छेद हो गया था। मरम्मत नहीं होने के कारण बारिश का पानी छत से रिसकर घरों के भीतर पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले छह साल से सीपीडब्ल्यूडी ने ब्लॉकों की मरम्मत नहीं करवाई है। कॉलोनी में पानी की टंकियां भी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं। पुराने समय में ब्लॉकों में 500 लीटर की पानी की टंकियां लगाई थीं लेकिन अब यह जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अप्रैल में लिखित शिकायत दी थी लेकिन छह महीने बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पानी की आपूर्ति तीसरे दिन होने से लोगों को पानी बाजार से खरीदना पड़ रहा है। 20 लीटर की बोतल करीब 200 रुपये में मिल रही है, जिससे घरेलू खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा, ब्लॉकों के आसपास उगी झाड़ियों की सफाई नहीं होने से सांप और बिच्छुओं के घरों में घुसने की आशंका रहती है। सफाई की जिम्मेदारी को लेकर विभागों के बीच तालमेल की कमी से लोग परेशान हैं। पार्क की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को घरों के पास बनी पार्किंग में खड़े वाहनों के बीच खेलना पड़ता है। लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से आवासों की मरम्मत, सूखे पेड़ों की छंटाई, झाड़ियों की सफाई और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
विभागों को कई बार लिखे पत्र
एजी कॉलोनी में कई सूखे पेड़ ब्लॉकों के लिए खतरा बने हुए हैं। इस बारे में डिप्टी मेयर उमा कौशल को अवगत करवाया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए थे, लेकिन महीनों बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बंदरों की समस्या भी बनी हुई है। महीने में दो से तीन मामले बंदरों के हमले के आते हैं, पार्किंग की सुविधा भी नहीं है।
समस्याओं का किया जाएगा समाधान
एजी कॉलोनी टुटीकंडी में रहने वाले लोगों की मांगों और समस्याओं का समाधान समय-समय पर किया जाता है। आवासों की मरम्मत का काम सीपीडब्ल्यूडी करवाता है। पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति मिल चुकी है, लेकिन इस संबंध में आगे की कार्रवाई भी सीपीडब्ल्यूडी को ही करनी है। स्ट्रीट लाइटें लगाने की मांग को भी पूरा किया जाएगा। -उमा कौशल, डिप्टी मेयर, नगर निगम शिमला
ये हैं कॉलोनी की पांच बड़ी समस्याएं लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक सूखे पेड़ों के गिरने का खतरा 13 ब्लॉकों में से चार में पार्किंग की सुविधा बच्चों के खेलने के लिए पार्क नहीं। स्ट्रीट लाइटों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं
इनसेट : आंकड़ों में जानें कॉलोनी का हाल 1997 में कॉलोनी पंजीकृत हुई करीब 500 लोग कॉलोनी में रहते हैं कॉलोनी में हैं 13 ब्लॉक कॉलोनी में बने 78 मकान