दलित शोषण मुक्ति मंच से जुड़े लोगों ने बुधवार को प्रदेश विधानसभा के बाहर घेराव किया और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दलित शोषण मुक्ति मंच के नेताओं का मानना है कि पिछले काफी समय से हिमाचल प्रदेश में दलितों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। इसके केदार जिदान, रजत, विमला देवी जैसे लोगों को तो मौत के घाट तक उतार दिया। आउटसोर्स या ठेके पर हो रही भर्तियां में आरक्षण लागू करने की मांग की गई है। मंच की ओर से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दलितों की 14 मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया।
दलितों की रैली को संबोधित करते हुए माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि वह विधानसभा के अंदर भी दलितों की आवाज बुलंद करते रहे हैं। दलितों पर हो रहा अत्याचार सहन नहीं किया जाएगा। इससे पहले मंच से जुड़े लोगों ने पंचायत भवन से लेकर कनेडी चौक तक जुलूस निकाला। दलित शोषण मुक्ति मंच के संयोजक विवेक कश्यप और जगत राम ने कहा कि शिमला जिला की बात करें तो यहां भी स्थिति ठीक नहीं है। दलितों को आज भी मंदिरों में प्रवेश की इजाजत नहीं है। आज भी छुआछूत का सिलसिला जारी है। दलित यदि देवताओं को छू लें तो उनसे मार पिटाई की जाती है।
जब थाने में शिकायत की जाती है तो दलित उत्पीड़न एक्ट के तहत शिकायतें दर्ज नहीं होती। इसके साथ ही ऐसे उत्पीड़न के मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है। इन नेताओं ने कहा कि आज भी एससी एसटी उपयोजना में जो पैसा दलित बस्तियों के लिए आता है, वहां पहुंचता ही नहीं नहीं है। आरक्षण को समाप्त किया का रहा है। सरकार दलितों पर हो रहे शोषण के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू किया जाए। उपयोजना में दलित बस्तियों तक विकास के लिया बजट दिया जाए।