मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह समेत आठ आरोपियों ने आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत याचिका दायर की है। सीबीआई कोर्ट के समन पर आरोपी अदालत में पेश हुए थे। कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 29 मई की तारीख तय की है।
सीबीआई के मुताबिक, वीरभद्र सिंह पर केंद्रीय मंत्री रहते हुए 10 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह राशि उनकी घोषित आय से 192 फीसदी अधिक पाई गई थी।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज वीरेंद्र कुमार गोयल के समक्ष वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह, चुन्नी लाल, जोगिंद्र सिंह घट्टा, प्रेमराज, लवन कुमार रोच, वाकामुल्ला चंद्र शेखर व राम प्रकाश भाटिया जारी समन पर पेश हुए।
कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आठ मई को इन्हें बतौर आरोपी समन जारी किया था। आरोपियों में से एलआईसी एजेंट आनंद चौहान की ओर से जमानत याचिका पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि वे न्यायिक हिरासत में है।
केस में 225 गवाह और 442 दस्तावेज
अदालत वीरभद्र से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की सुनवाई सात जुलाई को करेगी। जांच एजेंसी ने तीन अप्रैल 2017 को इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई)के प्रावधानों के तहत 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेज का हवाला दिया है। सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर हुआ था केस
सीबीआई के अनुसार, आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कथित तौर आय से अधिक 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की थी।
सीबीआई के मुताबिक, जांच में पता चला कि उनकी आय 192 प्रतिशत अधिक है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी थी। हाईकोर्ट ने छह अप्रैल 2016 को वीरभद्र सिंह को जांच में शामिल होने और सीबीआई को उन्हें गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया था।
सरकार कर रही जांच एजेंसियों का इस्तेमाल: दिग्विजय
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ आय से अधिक मामले की सुनवाई के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी कोर्ट पहुंचे थे।
मामले की सुनवाई के बाद बाहर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सीबीआई सरकार के इशारे पर कांग्रेस नेताओं को डराने व फंसाने का काम कर रही हैं।