कंपनी को मानसिक कष्ट के लिए 20 हजार मुआवजा देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नौ साल से चले वाहन मरम्मत विवाद में आखिरकार उपभोक्ता को न्याय मिल गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने टुटीकंडी निवासी आदेश कुमार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए गोयल मोटर्स को कार को चलने योग्य स्थिति में सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही कंपनी को 20 हजार रुपये मुआवजा भी देना होगा।
शिकायतकर्ता आदेश कुमार ने कार मरम्मत के लिए 1.68 लाख रुपये का भुगतान किया था। इसके बावजूद जब गाड़ी लेने पहुंचे तो वाहन न तो पूरी तरह रिपेयर पाया गया और न ही उसकी स्थिति संतोषजनक थी। गाड़ी के कुछ पार्ट्स गायब थे और माइलेज भी बढ़ा हुआ मिला। दरअसल 24 जुलाई 2016 को कंडाघाट में आदेश की कार हादसे का शिकार हुई। इसी साल 25 जुलाई को वाहन गोयल मोटर्स को सौंप दिया गया। तीन महीने बाद 8 अक्तूबर 2016 को मरम्मत पूरी होने का संदेश दिया गया लेकिन जांच में काम अधूरा निकला। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए तीन पत्र भेजे और 200 रुपये प्रति माह पार्किंग शुल्क की मांग भी की।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वाहन की समय पर डिलीवरी न होने से उपभोक्ता को मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा। इसलिए मुआवजा और वाहन की सही हालत में तत्काल डिलीवरी दोनों उचित हैं। मामले में मारुति सुजुकी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दर्ज शिकायत आयोग ने सबूतों के अभाव में खारिज कर दी। आयोग ने गोयल मोटर्स को 45 दिन में आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया कि वाहन डिलीवरी के समय कोई पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।