भारत का यूरोप-अफ्रीका से सड़क संपर्क काटने के लिए अंग्रेजों ने जाते-जाते विभाजन कर दिया था। इसके पीछे अंग्रेजों का मकसद था कि भारत फिर उभरकर विश्व शक्ति न बन पाए। यह बात केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने धौलाधार परिसर में कही।
उन्होंने ललितादित्य व्याख्यानमाला के तीसरे संस्करण के आगाज कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर की भू-राजनीति विषय पर अपने विचार रख रहे। उन्होंने कहा कि 200 साल तक अंग्रेजों ने भारत के लोगों को दबाने के लिए हर प्रकार की नीति अपना ली, लेकिन वे पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाए।
अंत में जाते समय उन्होंने भारत को विश्व के अन्य महाद्वीप से अलग थलग रखने के लिए विभाजन कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि भारत फिर उभरकर बड़ी ताकत बन भी जाए तो यूरोप-अफ्रीका के देशों से इसका सड़क संपर्क न रहे।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का विवाद भी इसी मंशा से सामने लाया गया। उन्होंने कहा कि ललितादित्य व्याख्यानमाला विभिन्न विषयों को समझने के लिए अच्छी पहल है।
वहीं, व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ. जयप्रकाश सिंह ने कहा कि तीसरे संस्करण में हर महीने बुधवार को अलग-अलग विषय पर स्रोत व्यक्ति विचार रखेंगे। व्याख्यानमाला जून 2019 तक चलेगी।
शुभारंभ व्याख्यान में सीयू के प्रो. वीसी हंस राज शर्मा, प्रो. रोशन लाल, प्रो. मनोज सक्सेना, डॉ. विवेक शर्मा, मोनिका कुमारी सहित शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।