क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में पुलिस की विशेष टीम (एसआईटी) अब आरोपियों के सगे संबंधियों का रिकॉर्ड खंगालने में जुट गई है। एसआईटी को आशंका है कि आरोपियों ने सगे संबंधियों के नाम पर भी प्लॉट और फ्लैट खरीदे हो सकते हैं। इसके अलावा इनके बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। एसआईटी बैंक और राजस्व विभाग के अधिकारियों के संपर्क में है। अब तक मामले में 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
आरोपी हेमराज, सुखदेव, अभिषेक और सुभाष की करीब 12 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। जांच में यह पहले ही सामने आ चुका है कि आरोपियों ने हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों में भी संपत्तियां बनाई हैं। एसआईटी के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में चार मुख्य आरोपी हैं। इन्होंने मिलकर ठगी का पूरा जाल बुना है और दोगुनी कमाई का झांसा देकर आरोपियों से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कराया।
आरोपी कई लोगों को विदेश भी ले गए थे। धंधे में लोगों का पैसा लगाकर खुद आरोपी मालामाल बन गए और करोड़ों की संपत्ति बना ली। जिस वेबसाइट से सारा धंधा ऑपरेट किया जा रहा था, पुलिस उसे रिकवर कर चुकी है। अब तक 2,500 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। ठगी मामले में पुलिस के निशाने पर वे 80 लोग हैं जिन्होंने क्रिप्टोकरेंसी से 2-2 करोड़ कमाए हैं, इनकी गिरफ्तारी होना तय है। पुलिस को मिली निवेशकों और एजेटों की आईडी से पता चला कि सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों में कार्यरत 5,000 कर्मचारियों ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया है। कुछ कर्मचारियों ने तो रातोंरात अमीर बनने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी और पूरी तरह से इसी काम में जुट गए।
आठ आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे
क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले में आठ आरोपियों को 14 दिन तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। वीरवार को आरोपी शिमला कोर्ट में पेश किए गए। आरोपी 5 नवंबर को गिरफ्तार किए गए थे। तब से ये पुलिस रिमांड पर चल रहे थे। अब तक ठगी मामले में 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।