क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामले के आरोप में फंसे पांच पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ एसआईटी चालान तैयार कर रही है। जिला कोर्ट शिमला में चार्जशीट पेश करने से पहले एसआईटी ने सरकार से अनुमति मांगी है। बताया जा रहा है कि कर्मचारी होने के नाते विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। पुलिस जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों ने लोगों को लखपति बनने के सपने दिखाए और लोगों को पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित किया। लोगों ने विश्वास जताते हुए लाखों रुपये क्रिप्टोकरेंसी में लगाए हैं।
2500 करोड़ रुपये की ठगी के इस मामले में अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच में नए नामों का खुलासा हो रहा है। ऐसे में पुलिस इन लोगों से भी पूछताछ कर रही है। कई आरोपी बाहरी राज्यों के भी हैं। इनको हिमाचल लाने के लिए एसआईटी यूपी, पंजाब, हरियाणा और गुजरात में दस्तक दे रही है। उल्लेखनीय है कि पुलिस एसआईटी की ओर से अब तक जिला कोर्ट में दो चार्जशीट दायर की जा चुकी है। अब तीसरी चार्जशीट पेश होनी है।
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20 करोड़ की संपत्ति की जा चुकी सीज
पुलिस एसआईटी की ओर से अब तक आरोपियों की 20 करोड़ की संपत्ति सीज की जा चुकी है। मुख्य आरोपी सुभाष और मेरठ का इंजीनियर दुबई भागा है। इनको हिमाचल लाने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस एसआईटी की ओर से सुभाष की हिमाचल और बाहरी राज्यों में संपत्ति को सीज किया जा चुका है। कुल 11 आरोपियों की संपत्ति जब्त की गई है जबकि अन्य की संपत्ति सीज करने के लिए एसआईटी दस्तावेज जुटा रही है।