सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग फीस (दर निर्धारण और संग्रहण) नियम, 2008 में संशोधन किया गया है। संशोधित नियम के अनुसार, यदि कोई वाहन बिना वैध, कार्यशील फास्टैग के टोल प्लाजा पर पहुंचता है और यूपीआई के माध्यम से शुल्क चुकाने का विकल्प चुनता है तो उसे संबंधित श्रेणी के अनुसार 1.25 गुना शुल्क देना अनिवार्य होगा। यदि किसी वाहन के लिए निर्धारित टोल शुल्क 100 रुपये है तो ऐसी स्थिति में चालक को 125 रुपये का भुगतान करना होगा।
यदि वाहन चालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियम 14 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला टोल प्लाजा पर सुगम यातायात सुनिश्चित करने, नकद या वैकल्पिक भुगतान से होने वाली देरी को कम करने और फास्टैग आधारित डिजिटल प्रणाली को मजबूती देने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे राजमार्गों पर जाम की स्थिति में कमी आने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। उधर, एनएचएआई पीआईयू मंडी के परियोजना निदेशक वरूण चारी ने बताया कि अधिसूचना के अनुसार ही टोल प्लाजा में नियम लागू रहेंगे। वाहन चालक फास्टैग को दुरुस्त रखें।