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इस ऐप ने बैंक खाते से गायब कर दिए पौने दो लाख, शातिरों ने ऐसे बनाया ठगी का शिकार

Fri, 13 Mar 2020 09:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
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हिमाचल के मंडी जिले के पंडोह के एक व्यक्ति के मोबाइल पर टीम व्यूअर नाम का ऐप इंस्टॉल करवाकर साइबर ठगों ने उसके बैंक खाते से 1 लाख 88 हजार की रकम गायब कर दी। साइबर अपराधियों ने पेटीएम के सत्यापन के लिए शिकायतकर्ता को फोन किया और उसके मोबाइल पर ऐप इंस्टॉल करवा दिया। ऐप इंस्टॉल करने के बाद रिमोट एक्सेस हासिल करने के कुछ अंतराल के बाद ही शिकायतकर्ता के खाते से दो किस्तों में रकम गायब कर दी। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को की गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

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पुलिस थाना सदर जिला मंडी में शिकायतकर्ता हिमांक राणा पुत्र ओम प्रकाश निवासी साम्बल डाकघर पंडोह तहसील सदर जिला मंडी ने शिकायत दर्ज करवाई है कि 12 मार्च को उसे करीब 11 बजे फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि वह पेटीएम की ओर से बोल रहा है और आपकी केवाईसी (नो योर कस्टमर) करनी है। शातिर ने शिकायतकर्ता को टीम व्यूअर ऐप इंस्टॉल करने को कहा। इसके डाउनलोड करने के बाद शिकायतकर्ता के खाते से दो किस्तों में 1, 88,348 रुपये निकाल लिए गए। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना की पुष्टि एसपी मंडी गुरदेव शर्मा ने की है। उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। 

आरबीआई जारी कर चुका है एडवायजरी
आरबीआई इस संबंध में पहले ही चेतावनी जारी कर चुका है। इसमें रिमोट ऐप से सावधान रहने को कहा गया है। टीम व्यूअर भी उन्हीं ऐप में से एक है। जालसाज कहीं भी बैठकर यूजर के फोन को एक्सेस कर उसका पूरा कंट्रोल अपने पास ले लेते हैं। आरबीआई की इस चेतावनी के बाद एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने एडवायजरी जारी कर दी थी। आईटी सेक्टर में काम करने वाले प्रफेशनल्स के लिए यह ऐप का काफी काम का है क्योंकि यह किसी भी मोबाइल या लैपटॉप को कहीं से भी एक्सेस करने की सहूलियत देता है। 

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इस तरह से होती है धोखाधड़ी

साइबर एक्सपर्ट जोकि मलिक के अनुसार जालसाज एक बैंक एग्जीक्यूटिव बनकर फोन करते हैं। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें गूगल पर मौजूद गलत कस्टमर केयर नंबर पर यूजर खुद ही फोन कर देते हैं। इन दोनों ही मामलों में फर्जी बैंक कर्मचारी बने ठग यूजर को ऐनी डेस्क या टीम व्यूअर क्विक सपॉर्ट ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।

ऐप के डाउनलोड होने के बाद इन साइबर क्रिमिनल्स को 9 अंकों वाले रिमोट डेस्क कोड की जरूरत पड़ती है। यह यूजर को अंक बताने के लिए आसानी से मना लेते हैं। 9 अंक वाला कोड मिलते ही ये यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन को आसानी से देख और कंट्रोल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, ये स्क्रीन को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।

चोरी हो जाते हैं बैंक डिटेल
स्क्रीन शेयर होने के साथ जालसाज यूजर की मोबाइल और कंप्यूटर एक्टिविटी को मॉनीटर कर सकते हैं। यह बैंक डिटेल चोरी करने का सबसे आसान तरीका है। जैसे ही यूजर अपने बैंक अकाउंट का यूजरनेम और पासवर्ड डालते हैं, वैसे ही ये जालसाज उसे नोट कर लेते हैं। यूपीआई पेमेंट ऐप के लिए यही तरीका अपनाया जाता है। इसमें सबसे चिंता वाली बात यह है कि ये ऐप फोन के लॉक होने के बाद भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं।
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