साइबर एक्सपर्ट जोकि मलिक के अनुसार जालसाज एक बैंक एग्जीक्यूटिव बनकर फोन करते हैं। कई बार ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें गूगल पर मौजूद गलत कस्टमर केयर नंबर पर यूजर खुद ही फोन कर देते हैं। इन दोनों ही मामलों में फर्जी बैंक कर्मचारी बने ठग यूजर को ऐनी डेस्क या टीम व्यूअर क्विक सपॉर्ट ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं।
ऐप के डाउनलोड होने के बाद इन साइबर क्रिमिनल्स को 9 अंकों वाले रिमोट डेस्क कोड की जरूरत पड़ती है। यह यूजर को अंक बताने के लिए आसानी से मना लेते हैं। 9 अंक वाला कोड मिलते ही ये यूजर के मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन को आसानी से देख और कंट्रोल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, ये स्क्रीन को रिकॉर्ड भी कर सकते हैं।
चोरी हो जाते हैं बैंक डिटेल
स्क्रीन शेयर होने के साथ जालसाज यूजर की मोबाइल और कंप्यूटर एक्टिविटी को मॉनीटर कर सकते हैं। यह बैंक डिटेल चोरी करने का सबसे आसान तरीका है। जैसे ही यूजर अपने बैंक अकाउंट का यूजरनेम और पासवर्ड डालते हैं, वैसे ही ये जालसाज उसे नोट कर लेते हैं। यूपीआई पेमेंट ऐप के लिए यही तरीका अपनाया जाता है। इसमें सबसे चिंता वाली बात यह है कि ये ऐप फोन के लॉक होने के बाद भी बैकग्राउंड में चलते रहते हैं।