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राज्यपाल से छुपाए गए तथ्य, अफसर नपेंगे

Mon, 02 Feb 2015 10:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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भारतीय पुलिस सेवा के हिमाचल काडर के अधिकारी एएन शर्मा को सेवा विस्तार देने के मामले में नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी की फाइल राजभवन भेजने वाले अफसर नपेंगे।
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तत्कालीन राज्यपाल उर्मिला सिंह ने प्रदेश सरकार को इस मामले से जुड़े पूरे तथ्य न रखने पर अफसरों के खिलाफ मेजर पेनल्टी लगाने को कहा है।

राजभवन की ओर से 20 जनवरी 2015 को अभियोजन मंजूरी की जो फाइल वापस लौटाई गई थी, उसी के साथ भेजे पत्र में सरकार को संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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तथ्यों को छुपाने की कोशिश

स्टेट विजिलेंस ब्यूरो की जांच के आधार पर प्रदेश सरकार ने आईपीएस एएन शर्मा मामले में प्रेम कुमार धूमल पर केस चलाने के लिए अभियोजन मंजूरी की फाइल जनवरी के शुरू में ही राज्यपाल को भेजी थी।

कानूनी राय लेने के बाद राज्यपाल ने फाइल प्रदेश सरकार को लौटा दी थी, जिसमें हवाला दिया गया कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ सीडी मामले और एचपीसीए मामले में भी धूमल के खिलाफ केस चलाने के लिए मंजूरी नहीं ली गई।

राज्यपाल ने टिप्पणी की कि अफसरों ने इस मामले से संबंधित तथ्यों को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की। राजभवन ने इसे मिस कंडक्ट भी करार दिया है।
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क्या हो सकता है मेजर पेनल्टी में

मेजर पेनल्टी के तहत संबंधित अधिकारियों को बर्खास्त किया जा सकता है। नौकरी से हटाया जा सकता है। उन्हें डिमोट या उनका इंक्रीमेंट कम किया जा सकता है।

कौन-कौन से विभागों के अफसर
विजिलेंस, पुलिस, गृह, सामान्य प्रशासन और विधि विभाग के अफसर फाइल तैयार करने में शामिल रहे हैं। पत्र में उर्मिला सिंह ने कहा है कि इन अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में मेजर पेनल्टी लगाई जाए। साथ ही की गई कार्रवाई की सूचना भी राजभवन को दी जाए।
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