शिक्षा विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रखा। साल 2013-14 से लेकर साल 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी किसी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं की।
विभिन्न आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर लिखकर बैंक खाते खुलवाए गए। इन नंबरों पर ही ओटीपी प्राप्त कर फर्जी तरीके से धनराशि निकाली गई। चार साल के दौरान केंद्र सरकार से प्राप्त हुई कुल छात्रवृत्ति राशि का अस्सी फीसदी बजट निजी संस्थानों को ही बांट दिया गया।
चार साल में 2772 शिक्षण संस्थानों के 2.38 लाख पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति जारी की गई। इसमें 2506 सरकारी संस्थानों को मात्र 56 करोड़ और 266 निजी शिक्षण संस्थानों को 210 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई।
केंद्र सरकार कर रही है मामले की मॉनीटरिंग
छात्रवृत्ति घोटाले की केंद्र सरकार गहनता से मानीटरिंग कर रही है। जनजातीय विकास मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय ने साल 2013 से 2016 तक जारी हुई छात्रवृत्ति राशि का संस्थानों सहित ब्योरा मांगा है।