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पेड़ कटान में अफसर या नेता का हाथ, डीएफओ को बदला

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शिमला के तारादेवी मंदिर के पास जंगल में किन प्रभावशाली लोगों की शह पर 477 पेड़ काटे गए हैं। उच्च पदस्थ अफसरों की चुप्पी मामले को और गहरा रही है। करोड़ों की कीमत की लकड़ी गायब है। कटाई का यह काम एक दिन में नहीं, बल्कि तसल्ली से किया गया है।
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मौके पर ऐसे कई साक्ष्य मौजूद हैं। अमर उजाला की टीम ने मौके का मुआयना किया। एक भी कटा पेड़ आसपास नहीं मिला। केवल पेड़ों की टहनियों को बड़े-बड़े गड्ढों में डालकर जलाया गया। करोड़ों की लकड़ी गायब है। घने जंगल के बीच से गायब हुई लकड़ी का कोई सुराग नहीं है।

काटे गए पेड़ कहां हैं? वन विभाग के अफसरों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कई प्रभावशाली और उच्च पदस्थ लोगों की मिलीभगत के बिना इस काम को अंजाम नहीं दिया जाना संभव नहीं। पर्दे के पीछे ये कौन प्रभावशाली लोग हैं? वन महकमे और पुलिस की जांच में यह सामने आ सकता है। सब की निगाहें इसी पर टिकी हैं।
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हाईटेक मशीनों से काटे गए पेड़

हालांकि, वन महकमे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जंगल से होकर आने वाली सड़क में गाड़ियों के टायरों के निशान देखे गए हैं। संभावित है कि इसी सड़क से गाड़ियों में पेड़ों को नेशनल हाईवे तक पहुंचाया गया है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि आधुनिक मशीनों से पेड़ काटे गए हैं।

सुनियोजित तरीके से पेड़ों को काटने के बाद ठिकाने लगाया गया है। तारादेवी के जंगल में काटे गए पेड़ों की टहनियों को जलाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे किए गए हैं। जंगल में भी भारी मात्रा में टहनियां गिरी हुई हैं। बताया जा रहा है कि पेड़ काटने वालों ने तसल्ली से काम किया है।

मौके पर पेड़ काटने के बाद टहनियों को अलग किया है। इन्हें जलाने को बड़े-बड़े गड्ढे किए हैं। लगता है कि पेड़ों को मौके से स्लीपर की शक्ल में ले जाया गया है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से गुरेज कर रहे हैं।

हटाए गए डीएफओ

हिमाचल सरकार ने तारा देवी मंदिर के पास अवैध पेड़ कटान मामले को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को डीएफओ शिमला विनोद शर्मा का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। उनके स्थान पर मुख्यालय में तैनात रमन शर्मा को डीएफओ शिमला का कार्यभार दिया गया है।

विनोद शर्मा अब डीएफओ अरबन होंगे। इस सिलसिले में सरकार की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। मामले में जांच बैठा दी गई है। प्रदेश के प्रधान मुख्य अरण्यपाल एससी श्रीवास्तव ने बताया कि डीएफओ शिमला विनोद शर्मा का स्थानांतरण कर दिया गया है।

उनके स्थान पर रमन शर्मा को डीएफओ शिमला बनाया गया है। विनोद शर्मा को डीएफओ अरबन बनाया गया है। पेड़ कटान मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है। मामले में कंजरवेटर संजय सूद को जांच अधिकारी बनाया गया है। उनसे पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तत्काल मंगाई गई है।

निजी भूमि तो महज पांच सौ जुर्माना

तारादेवी के पास पेड़ कटान मामले की जांच में यदि काटे गए 477 पेड़ निजी भूमि पर निकलते हैं तो भूमि मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज जरूर होगी, लेकिन जुर्माना महज पांच सौ रुपये होगा। इसके अलावा कानून में छह माह की सजा का प्रावधान है।

पेड़ चाहे एक कटे या फिर इससे अधिक केस के हिसाब से जुर्माना और सजा होती है। वन महकमा भी सिर्फ यही मानकर चल रहा है कि पेड़ निजी भूमि में ही कटे हैं। भू संरक्षण अधिनियम 1978 के पेनल्टी क्लॉज में साफ है कि निजी भूमि पर बिना अनुमति के तय सीमा से अधिक पेड़ काटे जाते हैं तो उसके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है। इसमें प्रति केस पांच सौ रुपये तक की पेनल्टी ही होगी।

सरकारी भूमि पर प्रावधान कड़े
पेड़ सरकारी भूमि पर कटते हैं तो आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसमें कानून अलग है। इसमें पेड़ कटान मामले में निलंबित बीट गार्ड और बीओ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकारी भूमि पर पेड़ कटते हैं तो यहां सजा और जुर्माने के अलग-अलग प्रावधान हैं। सजा कोर्ट में विभाग की ओर से दायर केस के मुताबिक होती है।
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अवैध पेड़ कटान पर सरकार को नोटिस

तारा देवी मंदिर के पास अवैध पेड़ कटान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वीरवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लिया। ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाबतलब किया है।

इतना ही नहीं, निजी भू मालिकों से भी अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।  शिमला में 477 अवैध पेड़ कटान के मामले से प्रदेश भर में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

ट्रिब्यूनल ने उन सभी निजी भू मालिकों को भी नोटिस जारी कर अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं, जिनकी जमीन में अवैध कटान हुआ है। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को इन भू मालिकों की ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सर्किट बेंच ने मीडिया में खबरें आने के बाद संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किए हैं। इस मामले की आगामी सुनवाई आठ जनवरी को निर्धारित की गई है।
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