अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी आरके कौशल ने मामले को साबित करने के लिए 27 गवाहों के बयान कलमबंद करवाए।
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सरकारी धन के गबन के दोषी उपप्रधान को अदालत ने तीन साल के कठोर कारावास और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में प्रधान और एक अन्य सदस्य के खिलाफ अभियोग साबित न होने पर उन्हें बरी कर दिया गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलदेव सिंह की विशेष अदालत ने सदर उपमंडल के अरठी (बाडी गुमाणू) निवासी होशियार सिंह पुत्र टोडर राम के
खिलाफ भादंसं की धारा 467 और 468 के तहत जालसाजी और धोखाधड़ी करने का अभियोग साबित होने पर तीन-तीन साल कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि अदा न करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी वर्ष 2005 से 2010 तक ग्राम पंचायत बाड़ी गुमाणू का उपप्रधान था। उसने जाली और झूठे दस्तावेज तैयार करके 4200 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया था। इस बारे में गवाह भीम सिंह ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी हासिल की तो यह बात सामने आई।
सूचना से पता चला कि भूपिंद्र सिंह, कादसी देवी और महेंद्र पाल के जाली हस्ताक्षर मस्टर रोल करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने पुलिस को शिकायत दी थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करके अदालत में उपप्रधान, प्रधान और सदस्य के खिलाफ अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी आरके कौशल ने मामले को साबित करने के लिए 27 गवाहों के बयान कलमबंद करवाए।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस ने मस्टर रोल पर किए गए हस्ताक्षरों से मिलान के लिए आरोपियों के हस्ताक्षरों के नमूने लिए थे। इन नमूनों पर विशेषज्ञ ने अपनी रिपोर्ट देते हुए बताया कि आरोपी उप प्रधान के हस्ताक्षर ही मस्टर रोल से मिलते हैं। जिसके चलते अदालत ने आरोपी उपप्रधान को दोषी करार देते हुए उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।