सराहां के जंगलों में ऐसी कई भट्टियां अभी बनी हुई हैं। क्यारी कूहल के बाद पहला मामला जहां पर पकड़ा गया, उसकी दूरी सराहां चौपाल मुख्य सड़क से करीब दो किलोमीटर व गांव के संपर्क मार्ग से केवल 20 मीटर है। नाले में सड़क पर वाहनों की आवाजाही भट्ठी वाले स्थान के सामने से होती रहती है।
खास बात यह कि यहां पर भट्ठी कई साल पहले से बनी है। जाहिर है इस कारोबार के लिए कई मजदूर महीनों तक वहीं रहे होंगे। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है। प्रतिबंध के बाद भी दो साल पहले नाले में भट्ठी के पास सिडार ऑयल निकालने के लिए देवदार की लकड़ियों के ढेर लगे थे।
हालांकि विभाग ने मामला सामने आने के बाद लकड़ी नष्ट करने का दावा किया। लेकिन ऐसी नहीं हुआ। इस बार भी कई दिनों से प्लास्टिक के तिरपाल से लकड़ियां ढंकी पड़ी थीं। लेकिन वन विभाग ने न तो पहल की न ही दशकों पुरानी भट्टियों को नष्ट किया।
सिडार ऑयल से चर्म रोग की कई दवाइयां बनती हैं। केरल में इसकी अधिक मांग है। वहां पर कई आयुर्वेदिक औषधि में इसका अधिक प्रयोग होता है। विदेशों में भी इसका निर्यात किया जाता है।क्यारी के समीप तेल बरामद होने पर अधिकारियों के मौके से गायब रहने का वीडियो वन विभाग के गार्ड ने वायरल किया था।
वीडियो वायरल होने के बाद विभाग के संबंधित रेंज आफिसर का तबादला कर दिया गया। डीएफओ चौपाल एमएस चंदेल ने कहा उनको इसके दाम की जानकारी नहीं है। जिन लोगों के पास सिडार वुड ऑयल पकड़ा गया, विभाग उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
एसपी शिमला ओमापति जम्वाल का कहना है कि इस मामले में वन महकमे की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर थाना चौपाल में दर्ज कर ली गई है। आरोपियों को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है। मामले की जांच चल रही है।