युग हत्या और अपहरण मामले में दोषी करार दिए दोषियों की सजा पर बहस तथा सुनवाई के लिए सोमवार को अदालत परिसर में पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी बारिश के बावजूद काफी संख्या में लोग अदालत परिसर में पहुंचे थे।
थाना बालूगंज से दर्जनों जवानों और अधिकारियों के अलावा परिसर में एक इंस्पेक्टर, दो मुख्य आरक्षी और 16 जवानों की टुकड़ी तैनाती की थी। दस बजे तक अदालत परिसर में बहुत कम लोग नजर आ रहे थे।
राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के कारण दोषी पक्ष का वकील रास्ते में ही फंस गया था। इनका वकील दोपहर करीब बारह बजे परिसर पहुंचा। इसके बाद परिसर में तैनात पुलिस जवान सक्रिय होते नजर आए।
सुरक्षा कारणों के चलते दोपहर बारह बजे तक अपहरण और हत्या मामले के तीनों आरोपियों को अदालत नहीं लाया गया था। इसके बाद करीब 1:07 बजे पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच सबसे पहले पुलिस की गाड़ी अदालत के मुख्य गेट पर पहुंची।
इसके तुरंत बाद क्यूआरटी के जवानों का वाहन गेट पर रुका और जवानों सहित वहां पहले से मौजूद पुलिस जवानों ने सुरक्षा का घेरा बना दिया। देखते ही देखते कंडा जेल से तीनों दोषियों को लाई कैदी वैन गेट पर पहुंची।
मुंह पर रुमाल बांध कर तीनों दोषी अदालत के गेट पर उतरे और उन्हें सुरक्षा के बीच अदालत ले जाया गया। अंदर पहले से ही भारी संख्या में लोग जुट गए थे। 1:16 बजे तीनों को अदालत के समक्ष पेश करने को ले जाया गया। इसके कुछ देर बाद युग के पिता को भी अंदर बुलाया गया।
छह अगस्त को युग के अपहरण और हत्या मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद सोमवार की सुनवाई के लिए भारी संख्या में लोग अदालत पहुंचे थे। शिमला में सुबह के वक्त जोरदार बारिश हुई थी।
इसके बावजूद युग के पिता और उनके रिश्तेदार अदालत में पहुंचे थे। रास्ते बंद होने के बावजूद दस बजे से ही अदालत में भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। जघन्य अपराध के मामले मेें दोषी करार दिए चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पाल और विक्रांत
बक्शी को हालांकि रुमाल से मुंह ढककर अदालत में लाया गया लेकिन अदालत में पेश करने से पूर्व उनके चेहरों से रुमाल उतार दिए गए। दोषियों के चेहरों पर अदालत के फैसले और सजा को लेकर डर नजर आ रहा था।