हिमाचल में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए फोन टैपिंग मामले की जांच विजिलेंस ने पूरी कर ली है। अब जांच टीम मामले को अभियोजन की मंजूरी के लिए भेजने से पूर्व कानूनी सलाह ले रही है।
मामले में मुख्य आरोपी पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विजिलेंस इस मामले को उनकी सेवानिवृत्ति से पूर्व अभियोजन मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजना चाहती है।
इस मामले में विजिलेंस ब्यूरो सेवानिवृत्त पूर्व डीजीपी बी. कमल कुमार को गवाह बना चुका है। इसमें दो पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी और डा. डीएस मन्हास पर केस चलाया जा सकता है।
टेलीकॉम कंपनियों पर भी कार्रवाई की तैयारी
इसके अलावा सीआईडी के टेक्निकल विंग के एक इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है।
फोन टैपिंग मामले में विवादों में आए पूर्व पुलिस प्रमुख आईडी भंडारी को विवाद के कारण पुलिस प्रमुख के पद से भी हाथ धोना पड़ा था। वर्तमान में वे डीजी होमगार्ड के पद पर तैनात हैं।
विजिलेंस के अनुसार करीब 417 फोन नंबरों को बिना किसी अनुमति के टैप करने की बात भी जांच में सामने आई है। इस मामले में कुछ सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को भी सह आरोपी बनाया जा रहा है। आठ विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के मोबाइल फोन टैपिंग पर लगाए थे।
दो पूर्व डीजीपी समेत 35 लोगों से हो चुकी पूछताछ
इनमें कुछ कंपनियों पर निर्धारित समय से अधिक समय तक बिना अनुमति के टैपिंग की बात सामने आई है। ऐसे में उन्हें भी इस मामले में सह आरोपी बनाया जा सकता है।
चार्जशीट की फाइल तैयार हो चुकी है अगले सप्ताह कभी भी गृह विभाग को सौंपी जा सकती है।
विजिलेंस की जांच टीम इस मामले में पूर्व डीजीपी टीम तीन पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी, डीएस मन्हास, बी.कमल कुमार, एक आईपीएस, दो आईजी, आठ मोबाइल कंपनियों को नोडल ऑफिसर के अलावा सीआईडी के टेक्निकल सैल के कर्मचारियों सहित करीब 35 लोगों के पूछताछ कर चुके हैं।