मलयेशिया की दो कंपनियों ने परवाणू के एक कारोबारी को करीब डेढ़ करोड़ के लोहे के कबाड़ (स्क्रैप) की जगह चूरा भेज दिया। कारोबारी ने विदेशी कंपनियों को पूरा भुगतान कर दिया, लेकिन स्क्रैप की जगह पचास फीसदी से अधिक चूरे के कंटेनर थमा दिए।
इसका खुलासा कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज चंडीगढ़ की ओर से मिली सप्लाई की जांच के बाद हुआ। कारोबारी को 348 यूएस डॉलर प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से विदेशी कंपनियों ने चूना लगाया है। लोहे के चूरे की कीमत 12 यूएस डॉलर प्रति मीट्रिक टन है जबकि कारोबारी ने स्क्रैप का 360 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के हिसाब से भुगतान किया।
प्रदेश पुलिस मुख्यालय से डीजीपी के आदेश पर सीआईडी थाना शिमला में विदेशी कंपनी के दो निदेशकों और एक मैनेजर के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। वर्ष 1984 से स्क्रैप कारोबार से जुड़ी परवाणू की कंपनी के निदेशक ने लिखित में दी शिकायत में कहा है कि मलयेशिया की दो कंपनियों ने स्क्रैप के लिए उनसे संपर्क किया।
पहली सप्लाई बेहतरीन रही और डील के मुताबिक ही कंपनी ने सामान भेजा। दूसरी डील के लिए कंपनी ने ई मेल से स्क्रैप की पूरी जानकारी दी थी। इन विदेशी कंपनियों को छह महीने के भीतर माल पहुंचाना था। इसके लिए परवाणू के कारोबारी ने विदेशी कंपनियों को अग्रिम राशि के तौर पर यूएस डॉलर में भुगतान किया था।
छह महीने बाद जब स्क्रैप नहीं पहुंचा तो मलयेशिया की कंपनियों ने पूरी पेमेंट मांगी और कहा कि भुगतान होते ही सारा माल भेज देंगे। कारोबारी ने 1 लाख 86 हजार 310 यूएस डालर विदेशी कंपनियों के खाते में डाल दिए। भारतीय करेंसी में यह रकम करीब 1 करोड़ 43 लाख 50 हजार 285 रुपये बनती है।
पैसा जमा होने के बाद विदेशी कंपनियों की ओर से जो स्क्रैप भेजा गया वह बताए गए माल से मेल नहीं खा रहा था। कुल 338.620 मीट्रिक टन लोहे का स्क्रैप मंगवाया गया था, लेकिन विदेशी कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने कुल माल में 52.5 फीसदी लोहे का चूरा और 47.5 फीसदी लोहे का स्क्रैप भेजा। उधर, डीआईजी सीआईडी डॉ. विनोद कुमार धवन ने कहा कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सीआईडी हर पहलू पर मामले की तफ्तीश कर रही है।