राजधानी में पीलिया फैलाने के मुख्य आरोपी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर की हिमाचल हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी है। छह जनवरी से फरार चल रहे ठेकेदार को पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर के बाहर गिरफ्तार किया। इसी मामले में जेई और सुपरवाइजर जेल में हैं।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद आईपीएच महकमा भी एक्सईएन और एसडीओ को सस्पेंड कर एसई का तबादला कर चुका है। हाईकोर्ट में पुलिस ने बताया कि हर साल इस प्लांट के रखरखाव के लिए ठेकेदार को डेढ़ करोड़ रुपये दिए जाते हैं लेकिन ठेकेदार मात्र दस लाख रुपये खर्च करता है। आउट डेटिड क्लोरीन का प्रयोग किया जा रहा है। प्लांट से बिना ट्रीट पानी छोड़ा जाता था।
दूषित पानी की दर्शाते थे सही रिपोर्ट- प्लांट में कार्यरत सुपरवाइजर व केमिस्ट ने मैजिस्ट्रेट के पास दर्ज बयान में कबूल किया कि ठेकेदार के कहने पर हर रोज पानी के नमूनों की सही रिपोर्ट दर्ज करते थे जबकि पानी गंदा होता था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि ठेकेदार के साथ-साथ जन स्वास्थ्य विभाग भी उतना ही जिम्मेवार है। सरकार के जिम्मेवार कर्मचारियों की जमानत निचली अदालत ने खारिज की है। इसलिए ठेकेदार की जमानत भी रद्द की जाती है। मामला न्यायाधीश धर्र्मचंद चौधरी की अदालत में लगा था।
विशेषज्ञों की जांच में चौंकाने वाली बातें- एफआईआर दर्ज होने के बाद एसएफएसएल जुन्गा के विशेषज्ञों की मदद से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ढली और मल्याणा का निरीक्षण करवाया गया। इन दोनों जगहों पर पानी की जांच के लिए जो लैब स्थापित है, उसमें ठेकेदार अक्षय ने सही केमिकल उपलब्ध नहीं करवाए और न ही उसे कभी चेक किया गया। विशेषज्ञों ने पाया कि लैब में लगे उपकरण सालों से खराब हैं। प्लांट से कुछ पानी बिना ट्रीटमेंट आउट लेट में पाया गया। ब्लीचिंग पाउडर भी एक साल पुराना इस्तेमाल किया जा रहा था।
स्मार्ट पुलिस से दो कदम आगे निकला ठेकेदार
कई दिनों की आंख-मिचौनी के बाद आखिरकार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का ठेकेदार अक्षय डोगर पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। पुलिस की टीम सुबह से ही ठेकेदार को पकड़ने के लिए अदालत परिसर के बाहर डटी हुई थी। मीडिया का हजूम भी सुबह से मौके पर डटा था। पुलिस आरोपी को अदालत में पहुंचने से पहले ही हिरासत में लेने की फिराक में थी। लेकिन आरोपी स्मार्ट पुलिस से दो कदम आगे निकला।
वह सुबह करीब आठ बजे ही अदालत परिसर में दाखिल हो चुका था। इस स्थिति में पुलिस के पास हाथ मलने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था। वह तब तक आरोपी का इंतजार करती रही, जब तक वह बाहर नहीं आया। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही अब इस मामले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है।
पुलिस बराबर इस बात पर जोर देती आ रही है कि ठेकेदार से पूछताछ के बाद ही इस मामले से जुड़ी कड़ियां सामने आएंगी और कई सफेदपोश इस गठजोड़ में बेनकाब होंगे। एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने आरोपी ठेकेदार अक्षय डोगर को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है।
ढली थाना प्रभारी को कोर्ट की अवमानना का नोटिस
प्रदेश हाईकोर्ट ने ढली पुलिस थाना के प्रभारी पीडी ठाकुर को कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी कर आठ मार्च को अदालत में मौजूद रहने को कहा है। हाईकोर्ट ने यह नोटिस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के आरोपी ठेकेदार अक्षय डोगर के वकील विक्रांत चंदेल द्वारा दायर शिकायत पर दिया। वकील ने अपनी शिकायत में बताया कि जब वह अपने मुवक्किल अक्षय डोगर के साथ सुबह हाईकोर्ट के
बार रूम में मामले पर पूछताछ कर रहे थे तो ढली पुलिस थाना प्रभारी के साथ दो-तीन पुलिस वालों ने ठेकेदार को दबोचा। उसके साथ मारपीट की तथा उसे भी धमकाया। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा मानते हुए कोर्ट की अवमानना का नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई आठ मार्च को होगी। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई।
आईपीएच की निगरानी में चलेगा ट्रीटमेंट प्लांट- लोगों के लिए परेशानी बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। आईपीएच ने यह कदम शुरुआती जांच में इस बात की पुष्टि के बाद उठाया है कि प्लांट तय मानक से कम स्तर पर संचालित हो रहा था। साथ ही आईपीएच ने प्लांट संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था होने तक ठेकेदार के कांट्रेक्ट को टेंपरेरी तौर पर एक्सटेंड कर दिया है।
हालांकि इस दौरान आईपीएच के वरिष्ठ अधिकारी चौबीस घंटे प्लांट के संचालन की निगरानी खुद करेंगे। आईपीएच के चीफ इंजीनियर आरएम मुकुल ने बताया कि ठेकेदार को प्लांट तय शर्तोँ से कम स्तर पर चलाने को लेकर नोटिस दिया गया था।
साथ ही उसका एग्रीमेंट भी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक प्लांट का संचालन जारी रखा जाएगा। इसके लिए जेई स्तर के एक अधिकारी के निर्देशन में एक टीम चौबीस घंटे ट्रीटमेंट प्लांट में तैनात की गई है।