सीटू नेता डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर को आंदोलन के दौरान बेवजह हिरासत में लेने और टॉर्चर करने के मामले में पुलिस की ओर से की गई अपील को सोमवार को सत्र न्यायाधीश चंबा की अदालत ने खारिज कर दोषी पुलिस कर्मियों की सजा को बरकरार रखा है।
डॉ. कश्मीर ने बेवजह हिरासत में लेने के बाद पुलिस की ओर से बिना वजह उन्हें टॉर्चर करने के लिए पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। उसके बाद सीजेएम कोर्ट ने आरोपियों को 1 साल सजा और जुर्माना सुनाया।
आरोपी इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में गए, लेकिन सोमवार का सेशन कोर्ट चंबा ने 1 साल की सजा और जुर्माने की अपील को खारिज करते हुए इस सजा को बरकरार रखा है।
सीपीआईएम के प्रदेश समिति सदस्य अनिल मनकोटिया ने कहा कि हमीरपुर के रहने वाले पार्टी नेता डॉ. कश्मीर ठाकुर के पक्ष में आए कोर्ट के इस निर्णय का पार्टी स्वागत करती है।
मनकोटिया ने कहा कि चमेरा 3 चंबा में वर्ष 2006 में वीरभद्र सरकार के दौरान सीटू से जुड़े तीन मजदूरों की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद हत्यारों को गिरफ्तार करवाने को लेकर सीटू ने आंदोलन किया।
उसी आंदोलन में पुलिस ने सीटू नेता डॉ. कश्मीर सिंह ठाकुर को बिना वजह पुलिस हिरासत में ले लिया और अमानवीय प्रताड़ना दी। सोमवार को कोर्ट ने सजा के फैसले को बरकरार रखते हुए पांचों पुलिसकर्मियों को एक-एम साल की सजा व जुर्माना कायम रखा है।