करीब 250 करोड़ रुपये के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि निजी शिक्षण संस्थानों ने दो से लेकर 40 करोड़ रुपये तक की छात्रवृत्ति हड़पी है। सीबीआई की जांच में शुरू के 22 संस्थानों ने सबसे ज्यादा पैसे की गड़बड़ी की है। अब सीबीआई संस्थान मालिकों को पूछताछ के लिए कार्यालय बुलाने जा रही है। बताया यह भी जा रहा है कि सीबीआई जल्द इस मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर सकती है।
सीबीआई ने निजी शिक्षण संस्थानों का रिकॉर्ड कब्जे में लिया है। कार्यालय में रिकॉर्ड को बारीकी से खंगाला जा रहा है। सीबीआई के हाथ शुरुआती दौर में जिन 27 संस्थानों की सूची आई, अब सीबीआई ने उनमें से पांच संस्थानों को शॉर्ट लिस्ट कर 22 पर ही जांच बैठाई है। उल्लेखनीय है कि सीबीआई जांच में शिक्षा विभाग की स्कॉलरशिप शाखा में तत्कालीन वरिष्ठ सहायक की बड़ी भूमिका सामने आ रही है।
अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी विद्यार्थियों के नाम पर फ र्जी छात्रवृत्ति जारी करने में इस वरिष्ठ सहायक का बड़ा रोल रहा है। हालांकि, इस कर्मचारी से ऊपर के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में भी पुख्ता सुबूत जुटाए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि अगर फ र्जी छात्रवृत्ति जारी करने के लिए कमीशन लिया जाता था तो वरिष्ठ सहायक अकेला ही इसे वसूल करता था या उन अधिकारियों की भी इसमें भूमिका रही है।