हिमाचल के टोल बैरियरों पर सेब सीजन के दौरान करोड़ों रुपये के घोटाले का अंदेशा है। इस पर राज्य सरकार जांच बैठाएगी। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मार्कंडा ने कार्रवाई की बात कही है।
बैरियरों की कमाई के तुलनात्मक आंकड़ों में भारी अंतर सामने आया है। इन बैरियरों पर बाहरी मंडियों को जा रहे सेब से जहां साल 2014 में 6.76 करोड़ रुपये की कमाई हुई, वहीं साल 2017 में कमाई घटकर 2.41 करोड़ रुपये ही दर्ज हो पाई।
मार्केटिंग बोर्ड के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सभी एपीएमसी में साल 2014 में 6.76 करोड़, 2015 में 8.45 करोड़, 2016 में 4.86 करोड़ और 2017 में मात्र 2.41 करोड़ की आमदनी हुई। बोर्ड ने बीते साल मार्च महीने में प्रदेश भर में करीब डेढ़ दर्जन टोल बैरियर बंद किए, जबकि इससे राज्य की 10 एपीएमसी को हर साल सात से दस करोड़ की कमाई होती रही।
कृषि और बागवानी उपज में से टोल बैरियरों पर केवल सेब पर ही यूजर शुल्क लिया जाता रहा है। ये यूजर शुल्क एक फीसदी की दर से आढ़तियों, बागवानों आदि से लिया जाता रहा है। बीते सेब सीजन में शिमला, कुल्लू और मंडी जिले के सभी टोल बैरियर बंद किए गए।
हालांकि, सोलन के परवाणू, स्वारघाट और कंडवाल बैरियर को यूजर चार्जेस वसूली को अधिकृत रखा गया। परवाणू बैरियर होते हुए शिमला, मंडी और किन्नौर जिले के ज्यादातर सेब देश की मंडियों को भेजा जाता है।
एपीएमसी शिमला को साल 2016 में यूजर चार्जेस से 3.20 करोड़ की आय हुई थी और 2017 में केवल 61 लाख रुपये की ही आमदनी हो पाई। सबसे ज्यादा सेब इन्हीं क्षेत्रों से आता है। यहां का ज्यादातर सेब परवाणू होते हुए देश की मंडियों में जाता है। ऐसे में आमदनी बढ़ने के बजाय घट गई है। इसी गड़बड़झाले की आशंका पर सरकार जांच करेगी।