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कैंची घोटाले की फाइल फाड़ने के मामले में सवालों के घेरे में कॉरपोरेशन

Fri, 23 Dec 2016 12:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कथित कैंची खरीद घोटाले की फाइल फाड़े जाने के बाद हिमाचल एग्रो इंडस्ट्री कॉरपोरेशन सवालों के घेरे में है। कॉरपोरेशन फाइल फटने के लिए जिम्मेवार रहे अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है। प्रदेश एग्रो इंडस्ट्री कॉरपोरेशन के इस कथित घोटाले की फाइल फाड़ने की बात विजिलेंस ब्यूरो की ओर से भेजी गई एक प्रश्नावली के जवाब बनाते हुए एक अधिकारी ने ही उजागर की थी। 
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‘अमर उजाला’ ने 17 नवंबर को ‘फाड़ डाली विदेशी कैंची खरीद घोटाले के सबूतों की फाइल’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से छापा था। प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में दस साल पहले हुए कथित विदेशी कैंची खरीद घोटाले के सबूतों की फाइल फाड़ दी थी। वर्ष 2008 में हुई शिकायत पर विजिलेंस जांच खोली गई थी। 

हालांकि, इसे अब बंद करने की भी तैयारी चल रही है। भाजपा शासनकाल में एक पूर्व मंत्री तक कथित घोटाले की जांच की जद में आ चुके थे। आरोप हैं कि सेब के पेड़ों की प्रूनिंग करने वाली ये विदेशी कैंचियां हिमाचल सरकार की मंजूरी की औपचारिकताओं को पूरा किए बगैर असल रेट से महंगी खरीदी र्र्गईं। सरकार को इससे आर्थिक नुकसान हुआ।
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जिम्मेवार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से कतराया

बागवानी तकनीकी मिशन के बजट से ये कैंचियां बड़ी संख्या में पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही वर्ष 2005 में खरीदी गई थीं। बागवानी विभाग ने खरीद केे लिए कॉरपोरेशन को नोडल एजेंसी बनाया था। विजिलेंस ब्यूरो ने हाल ही में इसी पुरानी शिकायत पर 16 पृष्ठों की एक प्रश्नावली कॉरपोरेशन को भेजी थी।

कॉरपोरेशन के एक अधिकारी ने जवाब तैयार कर मुख्य वित्त अधिकारी को भेजा। इसी में ये टिप्पणी लिखी थी कि संबंधित फाइल की हालत बहुत दयनीय है। कुछ पेपर बाहर निकल रहे हैं और नोट शीट के किनारे बुरी तरह से फट चुके हैं।

यानी, फाइल फटने की बात भी एक फाइल नोटिंग में ही सामने लाई गई थी, जिसे उजागर करने के बावजूद इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से निगम कतरा रहा है। 

हिमाचल प्रदेश एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक हिमांशु शेखर चौधरी ने बताया है कि विजिलेंस ब्यूरो ने जो जवाब मांगा है, उसे दे दिया गया है। अगर और भी कुछ पूछा जाएगा तो वह बताया दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चूंकि ये रिकार्ड पुराना है। ऐसे में धूल

पड़ जाती है। रिकार्ड इतना भी नहीं फटा है कि पढ़ने लायक नहीं हो। ऐसा भी नहीं है कि कारपोरेशन के पास मैटरियल ही नहीं है। क्या इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है? इस पर चौधरी बोले कि ऐसा करने की अभी जरूरत नहीं है। 
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