अभियोजन पक्ष द्वारा न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार 14 अगस्त 2001 को रामपुर तहसील पोस्ट ऑफिस के इंस्पेक्टर ने पुलिस स्टेशन निरमंड के समक्ष सरकारी धन के गबन के आरोप को लेकर प्रार्थी ग्रामीण डाक सेवक के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी।
शिकायत के अनुसार प्रार्थी ने निथर सब पोस्ट ऑफिस में कार्य करते कुल 57,500 रुपये का गबन किया और रफू चक्कर हो गया। आरोप था कि उसने कुछ आवर्ती खातों के पैसे जमा करवाने के बजाए खुद हजम कर लिए।
यह भी आरोप था कि उसने इंदिरा विकास पत्र के तहत प्राप्त धन को असली उपभोक्ता को देने के बजाय खुद ही हड़प लिया। न्यायिक दंडाधिकारी ने उसे एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने भी बरकरार रखा था।
प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली सर्कल के तहत आने वाली सड़कों पर लोक निर्माण विभाग की ओर से कराई जा रही घटिया मेटलिंग के मामले में जूनियर इंजीनियर राकेश कुमार, राजिंदर सिंह, गुरबचन सिंह, ज्ञान सिंह ठाकुर, असिस्टेंट इंजीनियर भूप सिंह राणा, रंजन कुमार गुप्ता, अधिशाषी अभियंता संदीप कुमार सोबती और व कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाने के आदेश दिए।
यह सभी अधिकारी जनवरी 2016 से दिसंबर 2017 तक कसौली सर्कल में तैनात थे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने रिश्वत निरोधक एवं सामाजिक कल्याण संघ कसौली की ओर से लिखे पत्र पर संज्ञान लेने वाली जनहित याचिका में यह आदेश पारित किए।
मामले में नियुक्त एमिक्स क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि इस घपले में ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत प्रतीत हो रही है। यह मिलीभगत का ही नतीजा था कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की ओर से सड़क की मेटलिंग व रखरखाव में की खामियां उजागर करने और ठेकेदार की ओर से समय पर काम पूरा न किए जाने के बावजूद करोड़ों की पेमेंट जारी कर दी गई।
हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि कसौली सर्कल में पड़ने वाली पीडब्ल्यूडी की सड़कों की मात्र 2 माह पहले टारिंग की गई थी, जो अब उखड़ गई है। सरकार ने करोड़ों रुपये इस काम के लिए खर्च किया। अब इस रोड पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इस मामले में खुलेआम सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। इसलिए हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार व इंजीनियरों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जाए।