ड्रग्स के एक फर्जी मुकदमे में गुड़गांव के युवक को फंसाने के मामले में बड़े ओहदे पर बैठे अफसरों की गर्दन भी फंस सकती है। प्रारंभिक जांच में सीबीआई ने यह पाया है कि जब फर्जी केस में फंसाए जाने की शिकायत पीड़ित के पिता ने की तो स्थानीय आला अधिकारियों ने एक विभागीय जांच कराई थी।
इस जांच में आरोपी पुलिस कर्मियों की कारगुजारी सामने आ भी गई थी। लेकिन स्थानीय अफसरों ने इसे नजरंदाज किया। रेंज और पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी इस मामले की जांच में सामने आए तथ्यों पर चुप्पी साधे रखी।
सूत्रों का कहना है कि चूंकि आरोपी पुलिस कर्मियों के ऊपर के अधिकारियों से अच्छे संबंध थे, इसलिए दोष साबित होने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों में किसी ने भी कार्रवाई करने की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा। अब सीबीआई की जांच में आरोपी पुलिस कर्मियों के अलावा उन्हें बचाने वाले व कार्रवाई न करने वाले अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।