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ड्रग्स मामलाः पुलिस कर्मियों को बचाने वाले अफसर नपेंगे

Tue, 05 Dec 2017 01:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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ड्रग्स के एक फर्जी मुकदमे में गुड़गांव के युवक को फंसाने के मामले में बड़े ओहदे पर बैठे अफसरों की गर्दन भी फंस सकती है। प्रारंभिक जांच में सीबीआई ने यह पाया है कि जब फर्जी केस में फंसाए जाने की शिकायत पीड़ित के पिता ने की तो स्थानीय आला अधिकारियों ने एक विभागीय जांच कराई थी। 
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इस जांच में आरोपी पुलिस कर्मियों की कारगुजारी सामने आ भी गई थी। लेकिन स्थानीय अफसरों ने इसे नजरंदाज किया। रेंज और पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी इस मामले की जांच में सामने आए तथ्यों पर चुप्पी साधे रखी। 

सूत्रों का कहना है कि चूंकि आरोपी पुलिस कर्मियों के ऊपर के अधिकारियों से अच्छे संबंध थे, इसलिए दोष साबित होने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों में किसी ने भी कार्रवाई करने की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा। अब सीबीआई की जांच में आरोपी पुलिस कर्मियों के अलावा उन्हें बचाने वाले व कार्रवाई न करने वाले अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।
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विभागीय कार्रवाई की तैयारी

सीबीआई की जांच से इतर मामले में जिला व पुलिस मुख्यालय के स्तर पर अलग-अलग जांच कराई गई थी। सूत्रों का कहना है कि मुख्यालय उन अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने पर विचार कर रहा है जिन्होंने गंभीर मामले को नजरंदाज किया।

इसमें तत्कालीन एडिशनल एसपी के अलावा एसपी और आईजी रेंज मंडी से भी सवाल जवाब किए जा सकते हैं कि आखिर क्यों उन्होंने मामले की शिकायत मिलने और जांच में आरोेप सही साबित होने पर कार्रवाई नहीं की।



हाईकोर्ट के आदेश से महकमे में हड़कंप
हाईकोर्ट ने शनिवार को जब सीबीआई को मामले में केस दर्ज करने के आदेश दिए तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पहले से ही नौ पुलिस अधिकारी-कर्मचारी गुड़िया केस में सीबीआई की गिरफ्त में हैं।

अब इस केस में तीन और कर्मियाें के फंसने के बाद पुलिस विभाग बेचैन है। सोमवार को तो दिन भर अफसरों में यह चर्चा रही कि मामले में गिरफ्तारी होगी या नहीं और कौन कौन मामले में फंस सकता है।
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