पहले से विवादों में रही बैम्लोई बिल्डर्स कंपनी में मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच बैठा दी है। ईडी की शिमला सब जोन ने इस पर तफ्तीश शुरू कर दी है।
यह शिमला सब जोन के पास मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का पहला मामला है। कंपनी को तरनतारन और अमृतसर से बिना शेयर के पैसा आने के आरोप हैं। इस जांच के खुलते ही देश के कई दिग्गज धनपतियों पर शिकंजा कस सकता है।
ईडी सब जोन कार्यालय शिमला के सहायक निदेशक भूपेंद्र सिंह नेगी ने बैम्लोई बिल्डर्स कंपनी पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की पुष्टि की है।
विजिलेंस दर्ज कर चुकी है केस
स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 22 नवंबर 2013 को बैम्लोई डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ शिमला में एक आपराधिक मामला दर्ज किया था।
यह आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120 बी के अलावा भारतीय वन अधिनियम की धारा 33 के तहत दर्ज किया गया। विजिलेंस ने इस मामले को दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय को भी इस पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू करने को लिखा था।
विजिलेंस जांच में यह भी पाया गया था कि इस कंपनी में तरनतारन और अमृतसर से स्टेक होल्डर रहे हैं, पर उन्हें कभी शेयर नहीं दिए गए। इस पर ही ईडी ने जांच बैठा दी है।
क्या है मामला
तीन साल पहले कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए पूर्व भाजपा सरकार पर कंपनी को अनावश्यक लाभ देने का आरोप लगाया। विजिलेंस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि सरकार को धोखे में रखकर जाली दरख्वास्त और झूठे दस्तावेज तैयार किए गए।
पेड़ कटान में भी अनियमितताओं के आरोप रहे हैं। कंपनी को गलत लाभ दिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग की बातें बाद में उठीं।