टिपरा के जंगल में मिली युवती की लाश की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद हत्या की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती जा रही है। हालांकि पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों शव की पहचान के लिए लोगों को बुलाया है, लेकिन पहचान नहीं हो सकी है।
उधर, दो दिन तक शव को स्थानीय ईएसआई अस्पताल में पहचान के लिए रखने के बाद पुलिस ने मंगलवार को शव पोस्टमार्टम के लिए आईजीएमसी शिमला भेज दिया है। रविवार को पुलिस ने स्थानीय टिपरा गाव के जंगल के पास एक 18-20 वर्षीय लड़की का शव बरामद किया था। लाश क्षत-विक्षत थी।
आसपास खून से सने पत्थरों के पाए जाने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करते हुए छानबीन शुरू की थी। लग रहा है कि पत्थरों से मार-मार कर युवती की हत्या हुई है। शव को पहचान के लिए स्थानीय ईएसआई के शव गृह में रखवा दिया गया था।
लेकिन दो दिन बाद भी न तो युवती की पहचान हो पाई है और न ही इस मामले में कोई सुराग पुलिस के हत्थे चढ़ पाया है। लिहाजा पुलिस ने आगामी कार्रवाई अमल में लाते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए शिमला भेज दिया है ताकि मौत किस वजह से हुई है, इसका पता लगाया जा सके।
जंगल में कई आपराधिक घटनाएं
परवाणू से टिपरा जाने वाले रास्ते व इसके साथ सटे घने जंगल में पहले भी कई आपराधिक घटनाएं हो चुकी हैं। लगभग पांच साल पहले इसी मार्ग पर एक मजदूर की लाश मिली थी। परवाणू में स्थापित उद्योगों में कार्यरत कई मजदूर टिपरा गांव में रहते हैं और आने जाने के लिए रात को इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। इसी रास्ते पर मजदूरों से पैसे छीनने की घटनाएं भी कई बार सामने आई हैं।
पिछले वर्ष हुआ था एक कत्ल- पिछले वर्ष कामली में एक मजदूर के हुए कत्ल के बाद यह दूसरा ऐसा मर्डर है, जिसमें पुलिस अंधेरे में ही तीर लगाती नजर आ रही है। कामली में हुए मर्डर में तो पुलिस हत्यारे की पहचान होने के बावजूद उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। अब यह मामला एक बार फिर पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है।
आसपास पुलिस थानों को दी सूचना- इस बारे में डीएसपी परवाणू प्रमोद चौहान से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले में आसपास के पुलिस थानों से भी मदद ली जा रही है व मधाला, पंचकूला, कालका व अन्य शहरों के जिन परिवारों से लड़किया गायब हैं, उन्हें शिनाख्त के लिए बुलाया जा रहा है। पुलिस जल्द ही मृतक की पहचान करने के प्रयास में है ताकि जल्द ही इस पूरे मामले का पटाक्षेप किया जा सके।