शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जनजातीय विभाग, शिक्षा विभाग, मुख्य सचिव कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात किसी भी अफसर ने इन छात्रवृत्ति योजनाओं के आवंटन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।
कभी भी यह देखने का प्रयास नहीं किया गया कि छात्रवृत्ति आवंटन हो रहा है नहीं। अब छात्रवृत्ति घोटाला सामने आने के बाद पूर्व सरकार में नियुक्त वरिष्ठ अफसर जांच की जद में आ गए हैं।
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में बीते पांच साल के दौरान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने का मामला जून महीने में सामने आया था। शिक्षा विभाग के निरीक्षण दल ने एक स्कूली विद्यार्थी को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की निदेशालय रिपोर्ट भेजी थी।
इसके बाद क्षेत्र के कई और विद्यार्थियों ने भी छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। कृषि मंत्री रामलाल मारकंडेय ने शिक्षा सचिव से इस मामले की शिकायत की थी। शिक्षा विभाग की जांच के दौरान पता चला कि प्रदेश में 150 करोड़ से अधिक राशि का छात्रवृत्ति आवंटन में घोटाला हुआ है।