चरस तस्करी करने के आरोपी के खिलाफ अभियोग साबित होने पर अदालत ने दस साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी के जुर्माना राशि निश्चित समय में अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलदेव सिंह के न्यायालय ने हरियाणा के झज्जर जिला के बहादुरगढ़ स्थित 8 बिस्वा जटवाड़ मोहल्ला निवासी गुलशन कुमार पुत्र जगफूल के खिलाफ मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोग साबित होने पर उक्त सजा का फैसला सुनाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार एक जनवरी 2010 को औट थाना पुलिस का दल एएसआई अमरनाथ की अगुवाई में झलोगी के पास वाहन पर गश्त कर रहा था।
इसी दौरान पुलिस दल को एक व्यक्ति एनएच-21 के पैरापिट पर बैठा हुआ दिखाई दिया। उक्त व्यक्ति पुलिस दल को देख कर घबरा गया और उसने भागने की कोशिश की। जिस पर पुलिस दल ने संदेह के आधार पर आरोपी को काबू करके उसके बैग की तलाशी ली तो इसमें से एक किलो 800 ग्राम चरस बरामद हुई।
पुलिस ने आरोपी को मादक एवं नशीले पदार्थ अधिनियम के तहत हिरासत में लेकर अदालत में अभियोग चलाया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी आरके कौशल ने 10 गवाहों के बयान कलमबंद करवा कर आरोपी पर अभियोग साबित किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों से आरोपी के खिलाफ चरस तस्करी का अभियोग संदेह की छाया से दूर साबित हुआ है। जिसके चलते अदालत ने आरोपी से बरामदशुदा चरस की मात्रा व्यवसायिक होने के कारण उसे उक्त कारावास और जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।