सीबीआई की विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश पूने राम पहाड़िया की अदालत ने शुक्रवार को नाबालिग छात्रा को अगवा कर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में मुख्य अभियुक्त बिहारी लाल को दस साल का कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
ठियोग के रहने वाले बिहारी लाल के अलावा इस मामले में अन्य तीन हमीरपुर के रहने वाले आरोपियों सुरेश कुमार, संदीप कुमार और बिंदरा देवी को दो-दो साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की पैरवी उप न्यायवादी सुधीर शर्मा ने की।
थाना कोटखाई के तहत 13 अप्रैल 2012 को पीड़िता का आरोप था कि चार अप्रैल 2012 को उसे संजू नामक व्यक्ति का फोन आया। वह स्कूल जाने की बजाय ठियोग आ गई। यहां अपने रिश्तेदारों के पास रुकी। अगले दिन सुबह छह बजे बस अड्डे पर उसे एक व्यक्ति मिला जिसने अपना नाम राजेंद्र बताया।
उसने उसे शादी करवाने को लेकर बहकाया। वह उसके बहकावे में आ गई। वह व्यक्ति उसे बस से हमीरपुर लेकर गया। यहां उक्त व्यक्ति ने हमीरपुर बस अड्डे में होटल में कमरा बुक करवाया। रात को उसने उसके साथ जबरदस्ती की। दूसरे दिन राजेंद्र ने एक युवक संदीप से मिलवाया।
उसके साथ एक व्यक्ति और एक औरत भी थी। राजेंद्र ने उनके साथ कुछ दिन रहने की बात कर जल्द शादी करवाने की बात कही। इसके बाद वह उनके घर पर रही। संदीप के माता पिता ने उसे अपने स्कूल सर्टिफिकेट को लाने के लिए कहा।
वो जब सर्टिफिकेट लेने अपने स्कूल गई तो उसके साथ ठियोग आए सभी वहां से भाग गए। पीड़िता ने राजेंद्र पर जबरन उसे संदीप और उसके माता पिता के हवाले करने का आरोप लगाया था।