सोहन लाल ने अपने छोटे भाई सुंकरू राम की तेजधार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी।
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प्रदेश हाईकोर्ट ने सगे भाई के हत्यारे की सजा बरकरार रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामपुर के फैसले पर मुहर लगा दी है। कोर्ट ने प्रार्थी सोहन लाल की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत ने साक्ष्यों और रिकार्ड को सही अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया है।
इसमें किसी भी तरह के फेरबदल की आवश्यकता नहीं है। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार प्रार्थी सोहन लाल ने अपने भाई सुंकरू राम की शादी साल 2001 में अपनी पत्नी से इस कारण करवाई थी कि वह पत्नी-बच्चों के भरण पोषण में नाकाम हो गया था।
22 सितंबर 2006 को दोनों भाइयों ने मेले के दौरान काफी शराब पी थी। उनका रात को झगड़ा भी हुआ था। सुबह प्रार्थी के भाई सुंकरू राम की खून से सनी हुई लाश बरामद हुई थी। जांच के दौरान तथ्य उजागर हुआ था कि प्रार्थी सोहन लाल ने अपने छोटे भाई सुंकरू राम की तेजधार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी।
23 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद प्रार्थी के खिलाफ ट्रायल सत्र न्यायाधीश रामपुर की अदालत के समक्ष चलाया गया। दोष साबित करने के लिए कुल 18 गवाह पेश किए गए। 12 मई 2009 को प्रार्थी सत्र न्यायाधीश ने आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।