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एलईडी बल्ब फर्जीवाड़े में खुलासा, ग्राहकों को ऐसे लगाया गया था चूना

Thu, 16 Feb 2017 12:04 AM IST
चैतन्य ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
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सस्ते एलईडी बल्ब के फर्जीवाडे़ में प्रदेश के हजारों उपभोक्ताओं को चूना लगा है। उपभोक्ताओं ने एलईडी बल्ब के लिए पूरा पैसा चुका दिया था, बावजूद इसके कई उपभोक्ताओं को मासिक बिजली बिल में किस्त के तौर पर पैसा जोड़ा गया था।
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हजारों उपभोक्ता इससे अनजान रहे, क्योंकि इसमें मासिक किस्त केवल दस रुपये थी। कुछ जागरूक नागरिकों ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा और इसकी शिकायत बिजली बोर्ड से की थी। उपभोक्ताओं का कहना था जब वे एलईडी का पूरा पैसा चुका चुके हैं तो बोर्ड मासिक बिल में इसकी उगाही किस आधार पर कर रहा है?

प्रदेश में कितने उपभोक्ता फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं, इसका सही आंकड़ा अब तक बिजली बोर्ड के पास नहीं है। बोर्ड दावा कर रहा है कि ऐसे सभी उपभोक्ताओं के पैसे लौटा दिए गए हैं और कंपनी का 61 लाख का भुगतान भी रोक दिया है।
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जब तक पूरी तरह से वेरिफिकेशन नहीं हो जाती, तब तक पैसा रिलीज नहीं किया जाएगा। सीआईडी मामले में कंपनी से रिकॉर्ड लेने के बाद बिजली बोर्ड से भी तथ्य एकत्रित करने जा रही है।

इतने बल्ब बेचने में किया गया फर्जीवाड़ा

बिजली बोर्ड को संबंधित कंपनी की ओर से पहले चरण में बताया गया था कि 2 लाख 72 हजार 161 एलईडी बल्ब प्रदेश में उपभोक्ताओं को किस्तों पर दिए गए हैं। जब उपभोक्ताओं के बिजली बिल, पहचान पत्र और फोन नंबर वेरिफिकेशन के लिए मांगे गए तो कंपनी की ओर केवल 1 लाख 82 हजार 565 एलईडी बल्बों का ही विवरण दिया गया।

इससे साफ हो गया था कि 89 हजार 596 एलईडी बल्बों में ईएमआई के नाम पर सीधा गोलमाल किया गया है। बिजली बोर्ड का दावा है मामले के पकड़ में आने के बाद इन एलईडी बल्बों की भरपाई कंपनी ने कर दी थी। पूरे प्रकरण में बिजली बोर्ड से कहां चूक हुई है, इस दिशा में भी सीआईडी जांच की बात कर रही है।  
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यहां जानिए, यह है मामला 

केंद्र सरकार की योजना के तहत बिजली उपभोक्ताओं को बेचे गए सस्ते एलईडी बल्ब में करोड़ों के घपले की जांच शुरू हुई है। आरोप है कि मैनपावर सर्विस मुहैया करवाने वालों ने दो कंपनियों के साथ फर्जीवाड़ा कर करीब 3 करोड़ 5 लाख 79 हजार 780 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। इसमें उपभोक्ताओं के साथ भी ठगी की गई है। सीआईडी मामले की छानबीन कर रही है।  
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